Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ रखने और बढ़ते प्रदूषण से लड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने 673.32 हेक्टेयर में फैले Central Ridge क्षेत्र को ‘Reserved Forest’ घोषित कर दिय
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर की हवा को साफ रखने और बढ़ते प्रदूषण से लड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने 673.32 हेक्टेयर में फैले Central Ridge क्षेत्र को ‘Reserved Forest’ घोषित कर दिया है। यह फैसला 9 मई 2026 को लिया गया, जिससे अब इस इलाके को कानूनी तौर पर सबसे ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।
सेंट्रल रिज को Reserved Forest बनाने से क्या फायदा होगा?
इस क्षेत्र को दिल्ली का ‘हरित फेफड़ा’ कहा जाता है क्योंकि यह शहर के तापमान को कम रखने में मदद करता है। यह इलाका एक प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह काम करता है जिससे आसपास के बड़े हिस्से में ठंडक रहती है। इसके अलावा, यह हवा की क्वालिटी सुधारने, जमीन के नीचे पानी का स्तर बढ़ाने और जैव विविधता को बचाने में मददगार होगा। अब यहाँ बिना अनुमति के पेड़ काटना, शिकार करना या जानवरों को चराना सख्त मना होगा।
सरकार की आगे की योजना और नियम क्या हैं?
Indian Forest Act, 1927 की धारा 20 के तहत इस क्षेत्र को सुरक्षित किया गया है। LG Taranjit Singh Sandhu ने इस घोषणा को मंजूरी दी है। सरकार अब यहाँ बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने का अभियान चलाएगी। इसमें नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम जैसे स्थानीय पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहे और प्रकृति का संतुलन बना रहे।
अब तक कुल कितना इलाका सुरक्षित हुआ?
दिल्ली के रिज इलाकों को बचाने का काम तेजी से चल रहा है। इससे पहले 24 अक्टूबर 2025 को Southern Ridge के करीब 4,080.82 हेक्टेयर हिस्से को Reserved Forest बनाया गया था। अब सेंट्रल रिज के जुड़ने के बाद दिल्ली में कुल 4,754.14 हेक्टेयर रिज जमीन सुरक्षित वन घोषित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि अन्य रिज क्षेत्रों को भी जल्द ही इसी तरह अधिसूचित किया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सेंट्रल रिज का कुल कितना क्षेत्रफल Reserved Forest घोषित हुआ है?
दिल्ली सरकार ने 673.32 हेक्टेयर के सेंट्रल रिज क्षेत्र को Reserved Forest घोषित किया है, जिससे अब यहाँ मानवीय गतिविधियाँ प्रतिबंधित होंगी।
Reserved Forest घोषित होने के बाद यहाँ कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?
सरकार यहाँ स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाएगी, जिनमें नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम शामिल हैं।