Delhi: राजधानी दिल्ली की हवा को साफ रखने वाले ‘ग्रीन लंग्स’ यानी सेंट्रल रिज (Central Ridge) के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली सरकार ने 673.32 हेक्टेयर इलाके को आधिकारिक तौर पर ‘Reserved Forest’ घो
Delhi: राजधानी दिल्ली की हवा को साफ रखने वाले ‘ग्रीन लंग्स’ यानी सेंट्रल रिज (Central Ridge) के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली सरकार ने 673.32 हेक्टेयर इलाके को आधिकारिक तौर पर ‘Reserved Forest’ घोषित कर दिया है। यह फैसला भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत लिया गया है, जिससे अब इस इलाके को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
रिज को रिजर्व फॉरेस्ट बनाने से क्या बदलाव आएंगे?
इस नए दर्जे के मिलने के बाद अब सेंट्रल रिज के इलाके में शिकार करना, पशु चराना और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित होंगी। अब यहाँ कोई भी काम बिना आधिकारिक अनुमति के नहीं हो सकेगा। यह कदम दिल्ली के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने और हरियाली बढ़ाने के लिए उठाया गया है। इससे सरदार पटेल मार्ग और राष्ट्रपति संपदा के आसपास के वन क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।
30 साल का इंतजार और सरकार की तैयारी
रिज के इलाकों को सुरक्षा देने की प्रक्रिया 1994 में शुरू हुई थी, लेकिन अंतिम कानूनी सुरक्षा मिलने में तीन दशक का समय लग गया। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। वहीं पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने कहा कि सरकार वैज्ञानिक तरीके से जंगलों के प्रबंधन और ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस फैसले को एलजी Taranjit Singh Sandhu ने भी मंजूरी दी है।
अब तक कितना हिस्सा सुरक्षित हुआ?
दिल्ली में रिज के कुल सुरक्षित इलाकों की स्थिति इस प्रकार है:
- सेंट्रल रिज का हालिया अधिसूचित क्षेत्र: 673.32 हेक्टेयर
- सदन रिज (Southern Ridge) का सुरक्षित क्षेत्र: 4,080.82 हेक्टेयर (अक्टूबर 2025 में घोषित)
- दिल्ली में कुल रिजर्व फॉरेस्ट रिज क्षेत्र: 4,754.14 हेक्टेयर
सरकार अब बचे हुए रिज इलाकों को भी रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर रही है और यहाँ स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों का बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सेंट्रल रिज को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि अब यह क्षेत्र भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत सुरक्षित है। यहाँ बिना अनुमति के शिकार, चराई या किसी भी तरह का निर्माण कार्य करना कानूनी अपराध होगा।
इस फैसले में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
इस निर्णय को मुख्यमंत्री Rekha Gupta और पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa के नेतृत्व में लागू किया गया, जिसे एलजी Taranjit Singh Sandhu ने अपनी मंजूरी दी।