Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी के पर्यावरण को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। Central Ridge के करीब 673.32 हेक्टेयर इलाके को अब ‘Reserved Forest’ घोषित कर दिया गया है। यह फैसला शनिवार, 9 मई 2026 को लिया गय
Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी के पर्यावरण को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। Central Ridge के करीब 673.32 हेक्टेयर इलाके को अब ‘Reserved Forest’ घोषित कर दिया गया है। यह फैसला शनिवार, 9 मई 2026 को लिया गया, जिससे अब इस इलाके में पेड़ों की कटाई और अवैध कब्जे जैसे कामों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
Central Ridge को Reserved Forest बनाने से क्या होगा फायदा
इस फैसले के बाद अब Central Ridge को Indian Forest Act, 1927 की धारा 20 के तहत कानूनी सुरक्षा मिली है। इसका मतलब है कि अब यहाँ बिना अनुमति के शिकार करना, पशु चराना, लकड़ियाँ काटना या बिना इजाजत अंदर जाना सख्त मना होगा। यह इलाका सरदार पटेल मार्ग और President’s Estate के पास पड़ता है, जो दिल्ली के लिए बहुत जरूरी इकोलॉजिकल जोन है।
32 साल का इंतजार हुआ खत्म, अब बढ़ेगा ग्रीन कवर
हैरानी की बात यह है कि इस इलाके के लिए शुरुआती नोटिफिकेशन 24 मई 1994 को ही जारी हो गया था, लेकिन इसे फाइनल दर्जा मिलने में 32 साल लग गए। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने इसे दिल्ली की प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के लिए एक मील का पत्थर बताया है। सरकार अब यहाँ नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम जैसे देसी पेड़ लगाने की योजना बना रही है।
अब तक कितनी जमीन बनी रिजर्व फॉरेस्ट
दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में Ridge इलाकों को सुरक्षित करने का काम चल रहा है। इससे पहले 24 अक्टूबर 2025 को Southern Ridge को भी रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया गया था। इस नए फैसले के बाद अब दिल्ली में कुल 4,754.14 हेक्टेयर Ridge एरिया को रिजर्व फॉरेस्ट का दर्जा मिल चुका है। LG Taranjit Singh Sandhu ने इस फैसले को अपनी मंजूरी दे दी है और अन्य इलाकों के लिए भी प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Central Ridge को रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि अब यह इलाका Indian Forest Act, 1927 की धारा 20 के तहत सुरक्षित है। यहाँ अब अवैध रूप से पेड़ों की कटाई, शिकार और पशु चराने जैसी गतिविधियों पर कानूनी रोक रहेगी।
इस फैसले से दिल्ली के पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?
इससे दिल्ली का ग्रीन कवर बढ़ेगा और जैव विविधता सुरक्षित होगी। सरकार यहाँ नीम, पीपल और जामुन जैसे स्थानीय पेड़ लगाएगी जिससे शहर का पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा।