Delhi में कंक्रीट का जंगल बनी सेंट्रल दिल्ली, 32 सालों में खत्म हुआ 74 फीसदी इकोसिस्टम

Delhi: राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच बसा सेंट्रल दिल्ली अब धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में बदल रहा है। Jamia Millia Islamia की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि पिछले 32 सालों में सेंट्रल दिल्ली ने अपने सबसे सेहतमंद इकोस

Delhi: राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच बसा सेंट्रल दिल्ली अब धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में बदल रहा है। Jamia Millia Islamia की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि पिछले 32 सालों में सेंट्रल दिल्ली ने अपने सबसे सेहतमंद इकोसिस्टम का करीब 73.8 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और यमुना के मैदानी इलाकों में आई कमी ने इस स्थिति को और खराब कर दिया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया के Geography और Environmental Science विभाग के शोधकर्ताओं ने 1991, 2001, 2011 और 2023 के Landsat सैटेलाइट इमेजरी का विश्लेषण किया। इस रिसर्च में पाया गया कि 1991 में सेंट्रल दिल्ली का 13.88 वर्ग किलोमीटर इलाका ‘बेहतरीन’ इकोसिस्टम हेल्थ वाला था, जो 2023 तक घटकर सिर्फ 3.63 वर्ग किलोमीटर रह गया। वहीं, खराब इकोसिस्टम वाला इलाका 38.57 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 54.90 वर्ग किलोमीटर हो गया है।

सिर्फ सेंट्रल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली के स्तर पर भी अच्छी सेहत वाले इकोसिस्टम में बड़ी गिरावट आई है। स्टडी के मुताबिक, ‘Excellent’ कैटेगरी वाला हिस्सा 51.5 प्रतिशत, ‘Good’ वाला 36.4 प्रतिशत और ‘Fair’ वाला 48.3 प्रतिशत कम हुआ है। इसका मुख्य कारण बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां और ग्रीन कवर का कम होना बताया गया है।

पर्यावरण को लेकर हाल ही में कई अपडेट्स आए हैं। 17 जून 2026 को National Capital Region Planning Board (NCRPB) ने Regional Plan 2041 को मंजूरी दी है, जो अगले दो दशकों तक दिल्ली और आसपास के राज्यों में विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय करेगा। दूसरी तरफ, दिल्ली फॉरेस्ट डिपार्टमेंट द्वारा सेंट्रल रिज के ‘रेस्टोरेशन’ के तरीकों पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि देसी प्रजातियों को हटाकर किए जा रहे काम से जैव विविधता को नुकसान पहुँच सकता है।

यमुना के फ्लडप्लेन यानी O-Zone को बचाने के लिए DDA और NGT लगातार काम कर रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी साफ किया है कि यमुना के इस संवेदनशील इलाके में रिहायशी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, जिसके चलते हाल के दिनों में कई अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाए गए हैं।