Delhi: दिल्ली के राजघाट पर 9 अप्रैल 2026 को अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विध
Delhi: दिल्ली के राजघाट पर 9 अप्रैल 2026 को अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 के खिलाफ आयोजित हुआ. एलायंस ऑफ ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन (AAPWA) के नेतृत्व में हुए इस विरोध में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. जवानों के परिवारों का आरोप है कि यह नया कानून उनके हितों के खिलाफ है और इससे जवानों के करियर की पदोन्नति पर बुरा असर पड़ेगा.
नए CAPF बिल के नियमों पर क्यों है जवानों को आपत्ति?
सरकार द्वारा लाए गए नए बिल में अधिकारियों की भर्ती और प्रतिनियुक्ति के लिए नए नियम तय किए गए हैं. AAPWA के अध्यक्ष एच.आर. सिंह का आरोप है कि यह बिल सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों का उल्लंघन करता है. जवानों के बीच नाराजगी की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:
- महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (SDG) के सभी पद अब केवल प्रतिनियुक्ति (Deputation) के जरिए भरे जाएंगे.
- अपर महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत पदों पर भी बाहर से अधिकारी लाए जाएंगे.
- महानिरीक्षक (IG) के 50 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति के लिए तय किए गए हैं.
- जवानों को डर है कि इससे बलों के अपने कैडर के अधिकारियों के प्रमोशन के रास्ते बंद हो जाएंगे.
जवानों की प्रमुख मांगें और आगे का आंदोलन
प्रदर्शन कर रहे परिवारों ने केवल बिल वापस लेने ही नहीं, बल्कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की भी मांग की है. इसके साथ ही जवानों को संगठित समूह ए सेवा (OGAS) का लाभ देने की बात भी दोहराई गई है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 15 जून को इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे.
| महत्वपूर्ण घटनाक्रम |
तारीख |
| राज्यसभा में बिल का पारित होना |
1 अप्रैल 2026 |
| लोकसभा में बिल का पारित होना |
2 अप्रैल 2026 |
| राजघाट पर बड़ा विरोध प्रदर्शन |
9 अप्रैल 2026 |
| राष्ट्रपति भवन तक प्रस्तावित कूच |
15 जून 2026 |
जवानों का कहना है कि कई कर्मियों को 15 से 17 साल तक पदोन्नति नहीं मिली है, जिससे उनमें काफी तनाव है. विपक्षी दलों ने भी इस बिल का विरोध किया है और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे जवानों के भविष्य के लिए नुकसानदेह बताया है. हालांकि, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे बलों के हित में बताया और कहा कि इससे भर्तियों में अधिक स्पष्टता आएगी.