Delhi में कैंसर मरीजों को नहीं मिल रही आर्थिक मदद, नियम और बजट की कमी से बढ़ी मुसीबत

Delhi: दिल्ली में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए सरकारी मदद पाना मुश्किल होता जा रहा है। नियमों की पेचीदगियों और बजट की कमी के कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उनकी जान पर बन आई है। ह

Delhi: दिल्ली में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए सरकारी मदद पाना मुश्किल होता जा रहा है। नियमों की पेचीदगियों और बजट की कमी के कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उनकी जान पर बन आई है। हाल ही में एक मामला सामने आया है जहां ब्रेस्ट कैंसर के आखिरी चरण से जूझ रही 48 वर्षीय आशा को इलाज के लिए भारी रकम की जरूरत है, लेकिन सरकारी सहायता अटक गई है।

आशा का इलाज AIIMS के झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में चल रहा है। उन्हें TDM-1 इंजेक्शन की जरूरत है जिसकी कीमत 10 लाख रुपये है। दिल्ली सरकार के ‘दिल्ली आरोग्य कोष’ (DAK) से उन्हें 5 लाख रुपये की मदद मिल सकती थी, लेकिन यह सहायता उन्हें नहीं मिल पा रही है। इस स्थिति से यह साफ है कि अगर मदद मिल भी जाए, तो भी इलाज का एक बड़ा हिस्सा मरीज को खुद ही उठाना पड़ता है।

दिल्ली आरोग्य कोष योजना के तहत कैंसर मरीजों को अधिकतम 5 लाख रुपये या इलाज की कुल लागत का 100% (जो भी कम हो) की वित्तीय मदद दी जाती है। इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें हैं। आवेदक को कम से कम तीन साल से दिल्ली का निवासी होना चाहिए और परिवार की सालाना आय 3 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। आय के प्रमाण के लिए राशन कार्ड या SDM द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र जरूरी होता है। साथ ही इलाज सरकारी अस्पताल में होना अनिवार्य है।

योजना के नियमों में बदलाव और बजट को लेकर भी विवाद है। 7 मई 2026 के नए नियमों के मुताबिक, अब गरीब मरीजों को निजी अस्पताल भेजने से पहले सरकारी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता देखना जरूरी होगा। पहले नियम था कि अगर एक महीने में सरकारी अस्पताल में सर्जरी नहीं हो पाती थी, तो सरकार निजी अस्पताल का खर्च उठाती थी। वहीं, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने दावा किया था कि बीजेपी सरकार ने इस योजना का बजट रोका है, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों में टेस्ट और सर्जरी कराने में दिक्कत आ रही है।

ऐसे में मरीजों के पास कुछ अन्य विकल्प भी हैं। केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय आरोग्य निधि’ (RAN) और ‘स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी कोष’ (HMCPF) के जरिए BPL श्रेणी के मरीजों को 15 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है। इसके अलावा, दिल्ली में चार जिला डे केयर कैंसर सेंटर खोले जा रहे हैं, जहां मरीजों को मुफ्त कीमोथेरेपी की सुविधा मिलेगी।