Delhi के Cafe Beyond Eyes में देख नहीं पाने वाले युवा परोस रहे हैं खाना, हौसले की नई मिसाल
Delhi: राजधानी दिल्ली में एक ऐसा अनोखा कैफे खुला है जहां काम करने वाले ज्यादातर युवा देख नहीं सकते। ‘Cafe Beyond Eyes’ नाम का यह कैफे न केवल अपने खाने और माहौल के लिए जाना जा रहा है, बल्कि यहां काम करने वाले
Delhi: राजधानी दिल्ली में एक ऐसा अनोखा कैफे खुला है जहां काम करने वाले ज्यादातर युवा देख नहीं सकते। ‘Cafe Beyond Eyes’ नाम का यह कैफे न केवल अपने खाने और माहौल के लिए जाना जा रहा है, बल्कि यहां काम करने वाले युवाओं का जज्बा लोगों का दिल जीत रहा है। यह पहल दृष्टिबाधित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की एक बड़ी कोशिश है।
नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB) द्वारा संचालित यह कैफे अब विस्तार कर रहा है। दिल्ली के द्वारका कैंपस में 15 अप्रैल 2025 को शुरू होने के बाद, अब मई 2026 में आर.के. पुरम में भी इसकी नई शाखा शुरू की गई है। द्वारका स्थित कैफे को 10 सितंबर 2025 को ‘बेस्ट कैजुअल डाइनिंग कैफे’ का फूड आइकन अवार्ड 2025 भी मिल चुका है। इसी मौके पर NAB दिल्ली की डायरेक्टर वीणा मेहता वर्मा को ‘लीडिंग वुमन एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2025’ के सम्मान से नवाजा गया।
इस पहल के पीछे का मकसद सहानुभूति के बजाय अवसर देना है। NAB के जनरल सेक्रेटरी प्रशांत वर्मा ने बताया कि दृष्टिबाधित व्यक्ति भी पूरी कुशलता के साथ काम कर सकते हैं। उन्हें पेशेवर ट्रेनिंग देने के लिए शेफ अश्वनी कुमार सिंह ने अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने इन युवाओं को सेंसरी कुकिंग यानी इंद्रियों के आधार पर खाना बनाने की तकनीक सिखाई है। साथ ही, तत्सत फाउंडेशन और ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन दिल्ली ने भी इनके प्रशिक्षण और संचालन में मदद की है।
भविष्य की योजनाओं की बात करें तो तत्सत फाउंडेशन के साथ मिलकर एक फूड कार्ट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसका लक्ष्य अगले पांच सालों में 500 दृष्टिबाधित युवाओं को रोजगार देना है। शुभम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी ने भी इस समावेशी पहल को अपना समर्थन दिया है। इस मॉडल को आगे चलकर पूरे भारत में लागू करने की योजना है ताकि और भी युवाओं को हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में करियर बनाने का मौका मिले।