Delhi में कचरे से बनी हाइड्रोजन से चलेंगी बसें, नितिन गडकरी ने बताया 2027 तक देश को कचरा मुक्त करने का प्लान
Delhi: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर अब कचरे से बनी गैस से चलने वाली बसें दिख सकती हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संभावना जताई है कि भविष्य में दिल्ली की बसें म्युनिसिपल कचरे से तैयार हाइड्रोजन ईंधन से चलेंगी। इस कदम
Delhi: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर अब कचरे से बनी गैस से चलने वाली बसें दिख सकती हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संभावना जताई है कि भविष्य में दिल्ली की बसें म्युनिसिपल कचरे से तैयार हाइड्रोजन ईंधन से चलेंगी। इस कदम से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि शहर की गंदगी का निपटारा भी आसान हो जाएगा।
नितिन गडकरी ने देश को 2027 तक कचरा मुक्त करने की योजना पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के ठोस कचरे को बायोगेस्टर में डालकर मीथेन बनाई जा सकती है, जिसे बाद में हरे हाइड्रोजन में बदला जाएगा। उनका मानना है कि अगर हाइड्रोजन उत्पादन की लागत 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक आ जाती है, तो भारत ऊर्जा के मामले में दुनिया का बड़ा निर्यातक बन सकता है।
इस दिशा में दिल्ली में काम शुरू भी हो चुका है। मई 2026 में सेंट्रल विस्टा इलाके में टाटा मोटर्स की दो हाइड्रोजन शटल बसें शुरू की गईं, जो सौर ऊर्जा से बनी हरित हाइड्रोजन पर चलती हैं। इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026 में भी हाइड्रोजन वाहनों के पंजीकरण का प्रावधान रखा है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होगी।
फिलहाल हाइड्रोजन बसों को चलाने में कुछ चुनौतियां भी हैं। इंडियन ऑयल के विशेषज्ञों के अनुसार, इन बसों की परिचालन लागत सीएनजी बसों के मुकाबले ज्यादा है। जहां सीएनजी बस का खर्च करीब 60 रुपये प्रति किमी आता है, वहीं हाइड्रोजन बस का खर्च लगभग 100 रुपये प्रति किमी है। हालांकि, टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अशोक लीलैंड जैसी कंपनियां देश की 10 प्रमुख सड़कों पर हाइड्रोजन बसों और ट्रकों के पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट में NTPC लिमिटेड भी शामिल है, जो अपनी सीएसआर पहल के तहत हाइड्रोजन बसें उपलब्ध कराएगा और अतिरिक्त लागत का बोझ उठाएगा। गडकरी का विजन है कि शहरों के सीवेज पानी और ठोस कचरे का इस्तेमाल करके ईंधन बनाया जाए, जिससे बसों, ट्रकों और कारों को चलाया जा सके।