Delhi : राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की हालत खराब है। शहर को सुचारू रूप से चलाने के लिए 11,000 बसों की जरूरत है, लेकिन फिलहाल सड़कों पर सिर्फ 6,100 बसें ही चल रही हैं। बसों की इस कमी की वजह से लोग निजी वाहनों का इ
Delhi : राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की हालत खराब है। शहर को सुचारू रूप से चलाने के लिए 11,000 बसों की जरूरत है, लेकिन फिलहाल सड़कों पर सिर्फ 6,100 बसें ही चल रही हैं। बसों की इस कमी की वजह से लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बहुत बढ़ गया है।
निजी वाहनों की संख्या क्यों बढ़ी और क्या है मौजूदा स्थिति
बसों की कमी का सीधा असर दिल्ली की सड़कों पर दिख रहा है। आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, अब प्रति 1000 लोगों पर निजी वाहनों की संख्या बढ़कर 522 हो गई है, जो कि एक रिकॉर्ड स्तर है। पहले की सरकार द्वारा चलाई जा रही 3,700 पुरानी बसें अपनी उम्र पूरी कर चुकी थीं, जिन्हें 2024 से 2025 के बीच सड़कों से हटा दिया गया, जिससे बेड़ा और छोटा हो गया।
सरकार का आगे का प्लान और बसों का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने बसों की संख्या बढ़ाने के लिए एक समय सीमा तय की है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2029 तक कुल 14,000 बसें उपलब्ध कराना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम होगा:
| समय सीमा |
बसों का लक्ष्य |
| दिसंबर 2026 तक |
6,000 बसें |
| दिसंबर 2027 तक |
7,500 बसें |
| मार्च 2028 तक |
10,400 बसें |
| मार्च 2029 तक |
14,000 बसें |
इलेक्ट्रिक बसें और नए बदलाव क्या होंगे
प्रदूषण कम करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह इलेक्ट्रिक बसों पर जोर दे रहे हैं। केंद्र सरकार की PM-eDrive योजना के तहत DTC बेड़े में 2,800 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा, घनी आबादी वाले इलाकों और मेट्रो से कनेक्टिविटी के लिए 500 छोटी (7 मीटर लंबी) बसें चलाई जाएंगी। साथ ही, द्वारका में 4,200 करोड़ रुपये की लागत से एक Integrated Mobility Hub बनाने की योजना है, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी।