Delhi के BR कैंप में बुलडोजर एक्शन, 700 परिवार सावदा घेवरा शिफ्ट होंगे

Delhi: नई दिल्ली के जयपुर पोलो ग्राउंड और रेस कोर्स इलाके के पास स्थित BR कैंप झुग्गी बस्ती में बेदखली की कार्रवाई शुरू हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब 700 परिवारों को यहां से हटाकर सावदा घेवरा भेजा जा रहा

Delhi: नई दिल्ली के जयपुर पोलो ग्राउंड और रेस कोर्स इलाके के पास स्थित BR कैंप झुग्गी बस्ती में बेदखली की कार्रवाई शुरू हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब 700 परिवारों को यहां से हटाकर सावदा घेवरा भेजा जा रहा है। इस कार्रवाई से बस्ती में रहने वाले लोगों के बीच हड़कंप मच गया है और कई परिवार अपना सामान समेटने में जुटे हैं।

यह पूरी कार्रवाई प्रधानमंत्री आवास के आसपास के हाई-सिक्योरिटी ज़ोन (सफदरजंग रोड-लोक कल्याण मार्ग) में राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए की जा रही है। केंद्र सरकार इन संपत्तियों को वापस ले रही है। इस बेदखली की जद में BR कैंप के अलावा मस्जिद कैंप और DID कैंप के परिवार भी आए हैं। इन लोगों को उनके मौजूदा घरों से करीब 40-45 किलोमीटर दूर सावदा घेवरा में बसाया जा रहा है।

बस्ती के लोग इस फैसले से काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि वे अंग्रेजों के जमाने से यहां रह रहे हैं। ज्यादातर लोग आसपास के इलाकों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करते हैं, इसलिए इतनी दूर जाने से उनकी रोजी-रोटी छिन जाएगी। लोगों ने यह शिकायत भी की है कि कुछ दुकानों को बिना किसी चेतावनी के गिरा दिया गया। साथ ही, सावदा घेवरा में बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

कोर्ट ने इस मामले में मानवीय आधार पर कुछ निर्देश दिए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से सावदा घेवरा में स्कूलों और आने-जाने के साधनों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि विस्थापित लोगों को एक साल के लिए मुफ्त बस पास दिए जाएं और मेट्रो की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा, प्रत्येक परिवार को एक सीलिंग फैन, एक इंडक्शन कुकर और LPG कनेक्शन दिलाने में मदद करने का वादा भी लिया गया है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए उन्हें पास के सरकारी और MCD स्कूलों में दाखिला दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।

इस पूरे मामले पर राजनीतिक बहस भी छिड़ी रही। आम आदमी पार्टी ने इसे बिना उचित पुनर्वास के झुग्गियों को गिराने की साजिश बताया था, जबकि DDA ने पहले स्पष्ट किया था कि 31 दिसंबर 2026 तक विशेष प्रावधान अधिनियम के कारण किसी झुग्गी को नहीं गिराया जाएगा। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों को देखते हुए हाईकोर्ट ने बेदखली के आदेश को बरकरार रखा।