Delhi: राजधानी दिल्ली में आज 5 मई 2026 से ज्येष्ठ महीने के बड़े मंगल यानी बुढ़वा मंगल की शुरुआत हो गई है। इस साल एक खास संयोग बन रहा है क्योंकि अधिक मास की वजह से कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। ऐसा दुर्लभ मौका करीब 19 स
Delhi: राजधानी दिल्ली में आज 5 मई 2026 से ज्येष्ठ महीने के बड़े मंगल यानी बुढ़वा मंगल की शुरुआत हो गई है। इस साल एक खास संयोग बन रहा है क्योंकि अधिक मास की वजह से कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं। ऐसा दुर्लभ मौका करीब 19 साल बाद आया है, इसलिए भक्त हनुमान मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।
बड़े मंगल की तारीखें और महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को भगवान हनुमान की पूजा करना बहुत शुभ होता है। माना जाता है कि इसी महीने के मंगलवार को भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। इस साल 5 मई से लेकर 23 जून तक कुल 8 मंगलवार आएंगे। इन दिनों पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
| मंगलवार का क्रम |
तारीख |
| पहला बड़ा मंगल |
5 मई 2026 |
| दूसरा बड़ा मंगल |
12 मई 2026 |
| तीसरा बड़ा मंगल |
19 मई 2026 |
| चौथा बड़ा मंगल |
26 मई 2026 |
| पांचवां बड़ा मंगल |
2 जून 2026 |
| छठा बड़ा मंगल |
9 जून 2026 |
| सातवां बड़ा मंगल |
16 जून 2026 |
| आठवां बड़ा मंगल |
23 जून 2026 |
पूजा के नियम और सावधानियां
बुढ़वा मंगल के दिन भक्त व्रत रखते हैं और हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करते हैं। पूजा में सिंदूर और चमेली के तेल का उपयोग किया जाता है। साथ ही बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाया जाता है, जबकि दूध से बनी मिठाइयों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
- इस दिन किसी को उधार पैसे न दें, इससे आर्थिक तंगी आ सकती है।
- गरीबों, बीमारों और बुजुर्गों का अपमान न करें।
- हनुमान जी के साथ भगवान शिव और श्री राम की पूजा जरूर करें।
- शराब या किसी भी तरह के नशों से दूर रहें और अहंकार न करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस साल कितने बड़े मंगल पड़ रहे हैं और क्यों
इस साल कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। ज्येष्ठ महीने में अधिक मास (extra lunar month) होने के कारण यह दुर्लभ संयोग बना है, जो लगभग 19 साल बाद आया है।
बड़े मंगल पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
भक्तों को इस दिन किसी को उधार पैसे देने से बचना चाहिए और नशों का सेवन नहीं करना चाहिए। पूजा में बेसन या बूंदी के लड्डू चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करें।