Delhi: राजधानी के इकलौते वन्यजीव अभयारण्य Asola Bhatti Wildlife Sanctuary में विदेशी प्रजातियों के पेड़ों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। एक ताज़ा सर्वे में पता चला है कि यहाँ के कुल इलाके का 63.48% हिस्सा अब इन बाहरी पेड़ों स
Delhi: राजधानी के इकलौते वन्यजीव अभयारण्य Asola Bhatti Wildlife Sanctuary में विदेशी प्रजातियों के पेड़ों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। एक ताज़ा सर्वे में पता चला है कि यहाँ के कुल इलाके का 63.48% हिस्सा अब इन बाहरी पेड़ों से घिरा हुआ है। इससे यहाँ के प्राकृतिक माहौल और स्थानीय पेड़ों को काफी नुकसान पहुँच रहा है।
विदेशी पेड़ों से कितना नुकसान हुआ है
सर्वे के मुताबिक, यहाँ ‘Prosopis juliflora’ यानी विलायती कीकर सबसे ज्यादा फैल चुका है। इसके अलावा ‘Lantana camara’ भी यहाँ की जंगलों में बड़ी समस्या बन गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन विदेशी पेड़ों की वजह से यहाँ के देसी पेड़ जैसे ‘धौ’ धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं। इससे मिट्टी की क्वालिटी खराब हो रही है और जंगल का संतुलन बिगड़ रहा है।
वन विभाग का 10 साल का प्लान क्या है
इस समस्या से निपटने के लिए Delhi Forest Department ने 2024-25 से 2034-35 तक के लिए एक मैनेजमेंट प्लान लागू किया है। इसे Wildlife Institute of India (WII) की मदद से तैयार किया गया है। इस प्लान के तहत विदेशी पेड़ों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा और उनकी जगह स्थानीय पौधों को लगाया जाएगा। साथ ही पानी और मिट्टी को बचाने के लिए खास कदम उठाए जाएंगे ताकि जंगल फिर से हरा-भरा हो सके।
वन्यजीवों की ताज़ा स्थिति क्या है
मैनेजमेंट प्लान के हिस्से के रूप में साल 2024 में कई सर्वे किए गए। कैमरा ट्रैप की मदद से 23 तरह के स्तनधारी जानवरों की पहचान हुई, जिनमें रीसस मकाक सबसे ज्यादा दिखे। शांत इलाकों में तेंदुए और धारीदार लकड़बग्घे भी देखे गए। इसके अलावा, पक्षियों के सर्वे में 121 प्रजातियां और तितलियों के सर्वे में 53 प्रजातियां दर्ज की गईं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Asola Bhatti Sanctuary में कौन से विदेशी पेड़ सबसे ज्यादा हैं
यहाँ मुख्य रूप से Prosopis juliflora (विलायती कीकर) और Lantana camara जैसे विदेशी पेड़ फैल चुके हैं, जो कुल इलाके के 63.48% हिस्से पर कब्जा कर चुके हैं।
वन विभाग इन पेड़ों को हटाने के लिए क्या कर रहा है
वन विभाग ने 2034-35 तक का एक 10 साल का प्लान बनाया है, जिसमें विदेशी प्रजातियों के नियंत्रण और देसी पेड़ों को फिर से उगाने पर जोर दिया गया है।