Delhi: दिल्ली एयरपोर्ट पर अब यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल जाने के लिए बाहर जाकर बस पकड़ने की जरूरत नहीं होगी। जुलाई 2026 से एयरपोर्ट पर नया एयरसाइड ट्रांसफर सिस्टम शुरू होने जा रहा है। इससे टर्मिनल 1, 2 और 3
Delhi: दिल्ली एयरपोर्ट पर अब यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल जाने के लिए बाहर जाकर बस पकड़ने की जरूरत नहीं होगी। जुलाई 2026 से एयरपोर्ट पर नया एयरसाइड ट्रांसफर सिस्टम शुरू होने जा रहा है। इससे टर्मिनल 1, 2 और 3 के बीच आवाजाही बहुत आसान हो जाएगी और यात्रियों का काफी समय बचेगा।
नया सिस्टम कैसे काम करेगा और क्या होगा बदलाव
अब तक यात्रियों को टर्मिनल बदलने के लिए सिटीसाइड बसों का इस्तेमाल करना पड़ता था, लेकिन अब यह काम एयरसाइड से होगा। दिल्ली एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) इस काम के लिए BCAS और DGCA से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसके तहत खास बसें चलेंगी जिनकी रफ्तार 20 किमी प्रति घंटा होगी और एक टर्मिनल से दूसरे तक पहुँचने में करीब 20 मिनट लगेंगे। टर्मिनल 3 के पियर C को पूरी तरह इंटरनेशनल सुविधा में बदला जा रहा है ताकि विदेशी यात्रियों की संख्या बढ़ सके।
सामान और बोर्डिंग पास के लिए क्या हैं नियम
इस नए हब-एंड-स्पोक मॉडल में सामान (Baggage) को ले जाना आसान होगा। अगर फ्लाइट एक ही एयरलाइन की है, तो सामान सीधे मंजिल तक पहुँच जाएगा और यात्रियों को बीच में इसे उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यात्रियों को डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए अलग-अलग बोर्डिंग पास मिलेंगे, जिन पर ‘D’ और ‘I’ लिखा होगा। कस्टम और इमिग्रेशन की प्रक्रिया भी अब शुरुआती एयरपोर्ट या आखिरी एयरपोर्ट पर ही पूरी होगी।
कौन से एयरपोर्ट बनेंगे इंटरनेशनल हब
भारत सरकार दिल्ली के साथ-साथ मुंबई, बेंगलुरु और राजकोट एयरपोर्ट को भी इंटरनेशनल हब-एंड-स्पोक ट्रांसफर पॉइंट के रूप में विकसित कर रही है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बताया कि भारत की भौगोलिक स्थिति इसे ग्लोबल ट्रांजिट हब बनाने के लिए बहुत अच्छी है। इस योजना का मकसद विदेशी यात्रियों को भारत में रोकना और हवाई यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाना है। इसमें इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर जैसी कंपनियां मुख्य भूमिका निभाएंगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
टर्मिनल बदलने में कितना समय लगेगा और बस की स्पीड क्या होगी?
एयरसाइड बसों के जरिए एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुँचने में लगभग 20 मिनट का समय लगेगा। सुरक्षा कारणों से इन बसों में स्पीड गवर्नर लगा होगा और इनकी अधिकतम रफ्तार 20 किमी प्रति घंटा होगी।
क्या यात्रियों को अपना सामान दोबारा जमा करना होगा?
नहीं, हब-एंड-स्पोक मॉडल में अगर फ्लाइट एक ही एयरलाइन या कोडशेयर पार्टनर की है, तो सामान सीधा डेस्टिनेशन तक जाएगा। इंटरनेशनल यात्रियों का सामान भी एयरसाइड ऑपरेशंस के जरिए बिना किसी परेशानी के ट्रांसफर कर दिया जाएगा।