Delhi की हवा में घुला जहर, साल के 99% दिन WHO के मानकों से रहा प्रदूषण, रिपोर्ट में खुलासा

Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए सांस लेना और भी मुश्किल होता जा रहा है। EnviroCatalysts नाम के थिंक टैंक की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि 2026 के पहले छह महीनों में दिल्ली की हवा 99% दिनों तक WHO (विश्व स्व

Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए सांस लेना और भी मुश्किल होता जा रहा है। EnviroCatalysts नाम के थिंक टैंक की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि 2026 के पहले छह महीनों में दिल्ली की हवा 99% दिनों तक WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के तय मानकों से ज्यादा प्रदूषित रही। यह रिपोर्ट बताती है कि शहर की हवा की गुणवत्ता सेहत के लिए कितनी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है।

स्टडी के मुताबिक, 1 जनवरी से 20 जून 2026 के बीच के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि PM2.5 का औसत स्तर 2025 के 90 µg/m³ से मामूली घटकर 88 µg/m³ हुआ है, लेकिन यह अब भी बहुत ज्यादा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात सर्दियों के दौरान देखी गई, जहां 18 जनवरी 2026 को PM2.5 की मात्रा 484 µg/m³ तक पहुंच गई, जो पिछले साल के 450 µg/m³ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ गई।

WHO ने 2021 में अपनी गाइडलाइंस अपडेट की थीं, जिसमें PM2.5 की वार्षिक सीमा 5 µg/m³ और 24 घंटे की सीमा 15 µg/m³ तय की गई थी। वहीं भारत अपने National Ambient Air Quality Standards (NAAQS) का पालन करता है, जिसके तहत वार्षिक सीमा 40 µg/m³ और 24 घंटे की सीमा 60 µg/m³ रखी गई है। पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) का कहना है कि भारत अपनी घरेलू नीतियों और मानकों पर भरोसा करता है और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग या WHO की गाइडलाइंस को आधिकारिक आधार नहीं मानता।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली-NCR में पिछले कुछ सालों में सरकारी कोशिशों और जमीनी स्तर पर लागू किए गए नियमों की वजह से हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ग्राउंड लेवल ओजोन के स्तर में कमी आई है, लेकिन PM2.5 अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। 23 जून 2026 को एक रिपोर्ट में नई दिल्ली को दुनिया के 14वें सबसे प्रदूषित शहर के रूप में भी गिना गया था।