Delhi की हवा में बढ़ा ‘साइलेंट किलर’ कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर, सेहत के लिए गंभीर खतरा
Delhi: राजधानी दिल्ली की हवा अब और ज्यादा जहरीली होती जा रही है। हालिया रिपोर्ट में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के स्तर में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे विशेषज्ञों ने ‘साइलेंट किलर’ का नाम दिया है। यह गैस बिना क
Delhi: राजधानी दिल्ली की हवा अब और ज्यादा जहरीली होती जा रही है। हालिया रिपोर्ट में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के स्तर में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे विशेषज्ञों ने ‘साइलेंट किलर’ का नाम दिया है। यह गैस बिना किसी रंग, गंध या स्वाद के हवा में घुल जाती है और लोगों की सेहत पर चुपके से हमला करती है।
रिसर्च थिंक टैंक ‘एनविरोकैटलिस्ट’ के मुताबिक, 2026 के जनवरी से मई के बीच दिल्ली में कार्बन मोनोऑक्साइड का औसत स्तर 1.89 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। यह स्तर 2022 के बाद सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। खास तौर पर जनवरी और फरवरी के महीनों में इसने पिछले तीन-चार सालों के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। एनविरोकैटलिस्ट के विश्लेषक सुनील दहिया ने बताया कि सड़कों पर बढ़ती गाड़ियां और कचरा जलाने जैसी गतिविधियों की वजह से यह गैस हवा में बढ़ रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि यह गैस शरीर के लिए बहुत खतरनाक है। यशौदा मेडिसिटी के डॉ. राजेश कुमार गुप्ता के अनुसार, जब यह गैस सांस के जरिए शरीर में जाती है, तो खून में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम कर देती है। इससे हृदय और मस्तिष्क जैसे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके कारण सिरदर्द, चक्कर आना और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। यह स्थिति बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए ज्यादा जोखिम भरी है।
प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन ने कई कड़े कदम उठाए हैं। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने वाहनों के धुएं को कंट्रोल करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई है। दिल्ली में ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम लागू किया गया है, जिसके तहत बिना वैध प्रदूषण सर्टिफिकेट के पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। साथ ही, 1 नवंबर 2025 से गैर-BS6 वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
| संस्था/नियम | विवरण/मानक |
|---|---|
| भारतीय मानक | सुरक्षित स्तर: 2 मिलीग्राम/घन मीटर (8 घंटे का औसत) |
| WHO गाइडलाइन | सुरक्षित स्तर: 4 मिलीग्राम/घन मीटर (24 घंटे का औसत) |
| CPCB (18 जून 2026) | दिल्ली का AQI 143 (मध्यम श्रेणी) |
| पुराने वाहन नियम | 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन प्रतिबंधित |
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सर्दियों के पांच महीनों में एक व्यक्ति अनजाने में लगभग 9,000 सिगरेट के बराबर धुआं अंदर ले लेता है। इस समस्या से निपटने के लिए निजी गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है।