Delhi AIIMS को क्यों छोड़ रहे हैं बड़े डॉक्टर, 15 सीनियर फैकल्टी ने लिया VRS, कई पहुंचे प्राइवेट अस्पताल
Delhi: देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS दिल्ली से बड़े डॉक्टरों का पलायन हो रहा है। साल 2023 और 2025 के बीच अस्पताल के 15 वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों ने अपनी इच्छा से रिटायरमेंट (VRS) ले लिया है। इनमें विभागाध्यक्ष (HOD)
Delhi: देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS दिल्ली से बड़े डॉक्टरों का पलायन हो रहा है। साल 2023 और 2025 के बीच अस्पताल के 15 वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों ने अपनी इच्छा से रिटायरमेंट (VRS) ले लिया है। इनमें विभागाध्यक्ष (HOD) और प्रोफेसर शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 13 डॉक्टर अब निजी अस्पतालों में अपनी सेवा दे रहे हैं।
इस पलायन में कई बड़े नाम शामिल हैं। ऑर्थोपेडिक्स के HOD डॉ. राजेश मल्होत्रा और न्यूरोलॉजी की प्रमुख डॉ. एम.वी. पद्मा ने 2023 में इस्तीफा दिया। वहीं, कार्डियोलॉजी के HOD डॉ. बलराम भार्गव और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के HOD डॉ. एस.वी.एस. देव ने 2024 में अस्पताल छोड़ा। पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया भी VRS लेकर अब मेदांता अस्पताल में काम कर रहे हैं। डॉ. शिव कुमार चौधरी और डॉ. मिलिंद पद्माकर होते जैसे विशेषज्ञ अब फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट का हिस्सा हैं।
कागजों में इन इस्तीफों की वजह व्यक्तिगत कारण बताई गई है, लेकिन अंदरूनी तौर पर कई गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी सिस्टम की नौकरशाही और प्रशासनिक बोझ की वजह से उन्हें मरीजों के इलाज और रिसर्च के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, वेतन में बहुत बड़ा अंतर भी एक मुख्य कारण है। AIIMS में नए कार्डियोलॉजिस्ट को करीब 1 लाख रुपये महीना मिलता है, जबकि प्राइवेट अस्पताल इसके लिए 4 से 5 लाख रुपये तक की पेशकश करते हैं।
| प्रमुख कारण | विवरण |
|---|---|
| प्रशासनिक दबाव | नौकरशाही की अड़चनें और निर्णय लेने में स्वायत्तता की कमी |
| वेतन अंतर | सरकारी वेतन सीमा और प्राइवेट सेक्टर के भारी पैकेज में फर्क |
| संसाधनों की कमी | खरीद प्रक्रिया में देरी से सर्जरी रद्द होना और लंबी वेटिंग लिस्ट |
| नेतृत्व विवाद | संस्था के पारंपरिक पदानुक्रम में बदलाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप |
यह समस्या सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के अन्य AIIMS संस्थानों में भी दिख रही है। 2022 से 2024 के बीच देशभर के 20 AIIMS से कुल 429 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया है, जिसमें दिल्ली AIIMS से सबसे ज्यादा 52 इस्तीफे हुए। फिलहाल दिल्ली AIIMS में 1,306 स्वीकृत पदों में से 452 पद खाली हैं, यानी करीब 35 प्रतिशत फैकल्टी की कमी है। सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए अब रिटायर हो चुके डॉक्टरों को 70 साल की उम्र तक कॉन्ट्रैक्ट पर रखने का प्रावधान किया है।