Delhi: दिल्ली के AIIMS अस्पताल में अब पार्किंसंस बीमारी के मरीजों का इलाज बिना किसी सर्जरी के हो सकेगा। अस्पताल जल्द ही Focused Ultrasound Therapy (FUT) शुरू करने जा रहा है, जिससे खासकर उन मरीजों को राहत मिलेगी जिनके हाथ
Delhi: दिल्ली के AIIMS अस्पताल में अब पार्किंसंस बीमारी के मरीजों का इलाज बिना किसी सर्जरी के हो सकेगा। अस्पताल जल्द ही Focused Ultrasound Therapy (FUT) शुरू करने जा रहा है, जिससे खासकर उन मरीजों को राहत मिलेगी जिनके हाथ-पैर कांपते हैं। भारत में यह बीमारी अब कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर रही है, इसलिए यह तकनीक बेहद मददगार साबित होगी।
यह नई तकनीक क्या है और कैसे काम करेगी?
इस इलाज को MR-guided Focused Ultrasound (MRgFUS) कहा जाता है। इसमें बिना चीरा लगाए अल्ट्रासाउंड तरंगों के जरिए दिमाग के खास हिस्से का इलाज किया जाता है। यह सुविधा उन मरीजों के लिए होगी जिन पर दवाइयां असर नहीं कर रही हैं या जिन्हें पुरानी सर्जरी (DBS) नहीं दी जा सकती। Vattikuti Foundation ने फरवरी 2025 में AIIMS को Insightec Exablate® Neuro सिस्टम दान किया है।
इलाज कब से शुरू होगा और क्या होगा खर्च?
AIIMS का लक्ष्य अगस्त 2026 तक इस थेरेपी को पूरी तरह शुरू करने का है। न्यूरोलॉजिस्ट्स के लिए छह महीने का ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जाएगा, जिसके बाद मरीजों का इलाज शुरू होगा। प्रो. पी सरत चंद्रा ने बताया कि यह इलाज किफायती दाम पर उपलब्ध होगा और शुरुआत में AIIMS में इसे मुफ्त में दिया जाएगा।
भारत में पार्किंसंस के बढ़ते मामले और जरूरी जानकारी
भारत में पार्किंसंस की स्थिति अन्य देशों के मुकाबले अलग है। यहाँ लोग कम उम्र में ही इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
| विवरण |
जानकारी |
| औसत उम्र (Onset Age) |
51 साल |
| युवा मरीज (22-49 वर्ष) |
लगभग 45% |
| मंजूरी (Approval) |
FDA और CDSCO द्वारा मान्यता प्राप्त |
| मुख्य लाभ |
हाथों के कंपन (Tremor) में कमी |