Delhi: राजधानी दिल्ली को हर साल मानसून में होने वाले जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या से बचाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब शहर के नालों को सुधारने के लिए पुरानी तकनीक की जगह नई Precast Technology का इस्तेमाल
Delhi: राजधानी दिल्ली को हर साल मानसून में होने वाले जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या से बचाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब शहर के नालों को सुधारने के लिए पुरानी तकनीक की जगह नई Precast Technology का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ड्रेनेज सिस्टम को इतना मजबूत बनाना है कि भारी बारिश के दौरान भी सड़कों पर पानी जमा न हो।
Precast Technology क्या है और इससे क्या फायदा होगा?
पहले नालों को मौके पर ही कंक्रीट डालकर बनाया जाता था जिसे Cast-in-situ तकनीक कहते थे, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं टिकते थे। अब फैक्ट्री में बने RCC ड्रेन (Precast) का इस्तेमाल होगा। PWD मंत्री Parvesh Sahib Singh ने बताया कि ये नाले ज्यादा टिकाऊ होते हैं और इनकी उम्र करीब 50 साल होती है, जबकि पुराने नालों की उम्र सिर्फ 5-6 साल थी। इससे काम तेजी से होगा और सड़कों पर निर्माण सामग्री की वजह से होने वाला प्रदूषण और जाम भी कम होगा।
किन इलाकों में होगा काम और क्या है सरकार का प्लान?
PWD ने उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कई इलाकों के लिए 177 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं। इनमें मुख्य रूप से ये इलाके शामिल हैं:
- Gyan Shakti Mandir Marg और Chhoturam Marg
- Azadpur–Camp Chowk कॉरिडोर
- Sultanpuri, Rohini और Nangloi Road
- Maharaja Agrasen Marg
Delhi Drainage Master Plan 2025 के तहत लक्ष्य रखा गया है कि अगले तीन साल में जलभराव की घटनाओं को 50% तक कम किया जाए। साथ ही, बारिश के पानी को सोखने की क्षमता को 25 mm/hr से बढ़ाकर 70 mm/hr किया जाएगा।
मानसून से पहले की तैयारी और डेडलाइन
मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 30 जून तक नालों की सफाई और गाद (Silt) निकालने का काम पूरा कर लिया जाए। दिल्ली गेट और बारापुला जैसे बड़े नालों में सफाई का काम तेजी से चल रहा है। Union Minister Manohar Lal ने इस मास्टर प्लान को लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य अगले 30 सालों की ड्रेनेज जरूरतों को पूरा करना है।