Delhi में यमुना को साफ करने के लिए DDA ने शुरू किए ‘Yamuna Dialogues’, अब आम जनता की मदद से सुधरेगी नदी की हालत

Delhi: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को फिर से स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए Delhi Development Authority (DDA) ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत ‘Yamuna Dialogues’ नाम से पहला स्टेकहोल्डर कंसल्ट

Delhi: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को फिर से स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए Delhi Development Authority (DDA) ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत ‘Yamuna Dialogues’ नाम से पहला स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन वर्कशॉप शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया। इस मुहिम का मकसद यमुना के किनारों और बाढ़ प्रभावित इलाकों (floodplains) को बचाने के लिए एक साझा विजन तैयार करना है।

LG सरदार तरनजीत सिंह संधू ने साफ किया कि यमुना की सफाई सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि दिल्ली के निवासी, एक्सपर्ट्स और अन्य संबंधित लोगों को इस काम में बराबर का भागीदार बनाया जाए। LG के मुताबिक, जब आम लोग इस मुहिम से जुड़ेंगे, तभी यमुना के रिवर फ्रंट और फ्लडप्लेन का सुधार एक साझा सामाजिक मिशन बन पाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नदी की सफाई के लिए विज्ञान आधारित और मिल-जुलकर काम करने वाले तरीके अपनाए जाएं।

इस वर्कशॉप में मुख्य रूप से दो विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें फ्लडप्लेन की प्लानिंग और घाटों का विकास शामिल था। DDA ने बताया कि आने वाले हफ्तों में और भी वर्कशॉप होंगे, जिनमें पानी की क्वालिटी, ड्रेनेज सिस्टम, फंडिंग मॉडल और गवर्नेंस जैसे जरूरी मुद्दों पर बात की जाएगी। इसके बाद सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में दो बड़े डायलॉग सेशन होंगे। इन सेशन में ‘Delhi Yamuna Compact’ को फाइनल किया जाएगा, जो यमुना कॉरिडोर को ठीक करने का एक पूरा रोडमैप होगा।

यमुना की स्थिति को लेकर अन्य स्तरों पर भी सख्ती बरती जा रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने मई 2026 के एक आदेश में साफ कहा था कि जोन ‘O’ यानी फ्लडप्लेन में रिहायशी कॉलोनियां पूरी तरह गैरकानूनी हैं और वहां रहने वालों को राहत केवल 31 दिसंबर 2026 तक ही मिलेगी। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जून में एक रिव्यू मीटिंग के दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और औद्योगिक कचरे की निगरानी कड़ी करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कहा कि यमुना की सफाई एक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है, जिसके लिए ड्रेन इंटरसेप्शन और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग जैसी रणनीतियां अपनाई जा रही हैं।