Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने द्वारका में तीन बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए कमाई का एक नया तरीका निकाला है। अब DDA जमीन को सीधे बेचने के बजाय उसे लंबे समय के लिए लीज पर देगा। इस नई योजना से अगले 55 सालों में सरकार को
Delhi: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने द्वारका में तीन बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए कमाई का एक नया तरीका निकाला है। अब DDA जमीन को सीधे बेचने के बजाय उसे लंबे समय के लिए लीज पर देगा। इस नई योजना से अगले 55 सालों में सरकार को 29,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की लाइसेंस फीस मिलने की उम्मीद है।
द्वारका के किन तीन बड़े प्रोजेक्ट्स से होगी कमाई?
DDA ने द्वारका के अलग-अलग सेक्टर में तीन मुख्य प्रोजेक्ट्स की योजना बनाई है, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है:
| प्रोजेक्ट का नाम |
लोकेशन |
खासियत |
| फाइव स्टार होटल |
सेक्टर 23 |
2.5 एकड़ जमीन, कम से कम 200 कमरे |
| TOD प्रोजेक्ट |
सेक्टर 22 |
10.4 एकड़ जमीन, दिल्ली का पहला Transit Oriented Development |
| सुपर स्पेशलिटी अस्पताल |
सेक्टर 9 |
600 बेड वाला अस्पताल |
नई पॉलिसी से क्या बदलेगा और कितनी होगी इनकम?
DDA अब जमीन बेचने के पुराने तरीके को छोड़कर लाइसेंसिंग मॉडल अपना रहा है। इसका मतलब है कि जमीन का मालिकाना हक DDA के पास ही रहेगा और प्राइवेट कंपनियां इसे इस्तेमाल करने के लिए सालाना फीस देंगी। सेक्टर 23 के होटल प्रोजेक्ट के लिए सालाना 16.1 करोड़ रुपये (प्लस GST) की फीस तय हुई है, जिससे अकेले इस प्रोजेक्ट से 55 सालों में करीब 6,370 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
प्रोजेक्ट्स की समय सीमा और नियम क्या हैं?
DDA के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इस मॉडल से सरकारी जमीन भी सुरक्षित रहेगी और विभाग को हर साल एक तय कमाई होती रहेगी। इन तीनों प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर दिए जा चुके हैं। फाइव स्टार होटल को बनाने के लिए 42 महीने का समय दिया गया है। लाइसेंस फीस का निर्धारण कॉम्पिटिटिव बिडिंग यानी बोली लगाने की प्रक्रिया के जरिए किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DDA ने जमीन बेचने के बजाय लाइसेंस मॉडल क्यों चुना?
DDA चाहता है कि सरकारी जमीन का मालिकाना हक उसके पास ही रहे और साथ ही लंबे समय तक एक तय सालाना कमाई (Recurring Revenue) होती रहे।
द्वारका के होटल प्रोजेक्ट से कितनी कमाई होगी?
सेक्टर 23 के फाइव स्टार होटल प्रोजेक्ट से सालाना 16.1 करोड़ रुपये की फीस मिलेगी, जो कुल लाइसेंस अवधि में लगभग 6,370 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।