Delhi के यमुना बाजार में DDA का बुलडोजर एक्शन, 300 से ज्यादा घर टूटे, हजारों लोग बेघर

Delhi: दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में DDA ने अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में करीब 300 से 310 मकान गिराए गए, जिससे लगभग 1100 से 11,000 लोग सड़क पर आ गए हैं। यहां रहने वाले परिवारों का कहना है

Delhi: दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में DDA ने अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई में करीब 300 से 310 मकान गिराए गए, जिससे लगभग 1100 से 11,000 लोग सड़क पर आ गए हैं। यहां रहने वाले परिवारों का कहना है कि उनके पास अब न रहने को घर बचा है और न ही कमाई का कोई जरिया।

यह पूरी कार्रवाई 25 जून 2026 को सुबह 6 बजे शुरू हुई। मौके पर भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे। प्रशासन का कहना है कि यह इलाका यमुना फ्लड प्लेन (O-zone) में आता है, जहां निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी पर्यावरण की सुरक्षा और बाढ़ के खतरे को देखते हुए यहां से अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस कार्रवाई से पहले कई नोटिस जारी किए गए थे। 7 मई 2026 को DDMA और पुराने दिल्ली के ADM डॉ. शशिपल डबास ने 15 दिन का नोटिस दिया था। इसके बाद 13 और 15 मई को भी नोटिस भेजे गए। DDA ने 23 जून तक जगह खाली करने का समय दिया था, जिसके बाद 24 जून को कार्रवाई का ऐलान हुआ और 25 जून को बुलडोजर चला।

इलाके में रहने वाले नाविक, नाई, पंडित और फूल बेचने वाले अब बहुत परेशान हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जीवनभर इन्हीं घाटों पर काम सीखा, लेकिन अब उन्हें वहां जाने से रोका जा रहा है। कुछ निवासियों ने 1905 के दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस इलाके को मानसून की बाढ़ से बचाने के लिए मजनू का टीला से पुराने रेलवे ब्रिज तक 4.72 किलोमीटर लंबी ‘फ्लड प्रोटेक्शन वॉल’ बनाने को मंजूरी दी है। बेघर हुए लोगों के लिए DDA ने राजा गार्डन, सुल्तानपुरी, मुनिरका और गीता कॉलोनी में DUSIB नाइट शेल्टर का विकल्प दिया है। फिलहाल कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।