Maharashtra में नए सुरक्षा कानून का विरोध, Congress और CPI पहुंचे Bombay High Court
Maharashtra: महाराष्ट्र में लागू हुए नए सुरक्षा कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (महाराष्ट्र इकाई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने ‘महाराष्ट्र स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी एक
Maharashtra: महाराष्ट्र में लागू हुए नए सुरक्षा कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (महाराष्ट्र इकाई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने ‘महाराष्ट्र स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट, 2025’ की वैधता को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गुरुवार, 19 जून 2026 को दाखिल की गई इस याचिका में कानून को असंवैधानिक बताया गया है।
यह याचिका महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, महासचिव धनंजय शिंदे और CPI नेता प्रकाश रेड्डी की तरफ से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून सरकार को बहुत ज्यादा और मनमाने अधिकार देता है। उनका आरोप है कि बिना किसी न्यायिक निगरानी के सरकार किसी भी संगठन पर प्रतिबंध लगा सकती है और उसकी संपत्ति कुर्क कर सकती है, जो कि गलत है।
पिटीशन में कहा गया है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और उचित प्रक्रिया) का उल्लंघन करता है क्योंकि इसमें संगठन को बैन करने से पहले सुनवाई का मौका नहीं दिया जाता। साथ ही, यह अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली बोलने की आजादी, शांतिपूर्ण सभा करने और संगठन बनाने के मौलिक अधिकारों को भी प्रभावित करता है। याचिका में ‘गैरकानूनी गतिविधि’ और ‘गैरकानूनी संगठन’ जैसी परिभाषाओं को अस्पष्ट बताया गया है, जिससे सरकार विरोध करने वालों को निशाना बना सकती है।
इस कानून के बारे में कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा से पास | 10 जुलाई 2025 |
| विधान परिषद से पास | 11 जुलाई 2025 |
| राष्ट्रपति की मंजूरी | 15 दिसंबर 2025 |
| चुनौती देने वाली पार्टियां | Congress और CPI |
| मुख्य आपत्ति | मौलिक अधिकारों का हनन और शक्तियों का दुरुपयोग |
| कोर्ट से मांग | कानून को रद्द करना और तत्काल प्रभाव से रोक लगाना |
दूसरी तरफ, महाराष्ट्र सरकार का तर्क है कि यह कानून लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्ट (LWE) संगठनों और ‘अर्बन नक्सलवाद’ जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी है। कांग्रेस और CPI का दावा है कि इसका इस्तेमाल विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स की आवाज दबाने के लिए किया जाएगा। इससे पहले जुलाई 2024 में कांग्रेस विधायक दल के नेता सतेज पाटिल ने भी इस बिल के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया था। अब यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित है।