Congo में Ebola का कहर, 4120 लोग संक्रमित और 1887 की मौत, WHO ने जारी की चेतावनी
World : अफ्रीका के लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में इबोला वायरस ने भयानक रूप ले लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4,120 लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं और 1,887 लोगों की जान जा चुकी है। कांगो सरकार ने रविवार
World : अफ्रीका के लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में इबोला वायरस ने भयानक रूप ले लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4,120 लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं और 1,887 लोगों की जान जा चुकी है। कांगो सरकार ने रविवार को इन डराने वाले आंकड़ों को जारी किया, जिसके बाद पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।
यह संकट इतना गंभीर है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने 17 मई 2026 को इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया था। WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस ने चेतावनी दी है कि यह बीमारी तेजी से फैल रही है और संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बार वायरस का Bundibugyo स्ट्रेन सक्रिय है और यह कांगो में 1976 के बाद से 17वां इबोला प्रकोप है।
इस बीमारी से लड़ने के लिए WHO और अफ्रीका CDC ने मिलकर 518 मिलियन डॉलर का एक बड़ा रिस्पांस प्लान तैयार किया है। फिलहाल यह वायरस कांगो के पांच प्रांतों – Ituri, North Kivu, South Kivu, Haut-Uélé और Tshopo में फैला हुआ है, जिसमें Ituri सबसे ज्यादा प्रभावित है। इस बार संक्रमण की रफ्तार 2018 के प्रकोप से कहीं ज्यादा तेज है, क्योंकि महज 40 दिनों के भीतर ही 1,000 से ज्यादा केस सामने आ गए थे।
| विवरण | आंकड़े/जानकारी |
|---|---|
| कुल पुष्ट मामले | 4,120 |
| कुल मौतें | 1,887 |
| मृत्यु दर (Fatality Rate) | 45.8% |
| प्रभावित प्रांत | 5 (Ituri, North Kivu, South Kivu, Haut-Uélé, Tshopo) |
| प्रकोप की शुरुआत | 15 मई 2026 |
| वायरस का प्रकार | Bundibugyo strain |
सुरक्षा के लिहाज से US CDC ने सलाह दी है कि लोग Ituri और Nord-Kivu प्रांतों की यात्रा बिल्कुल न करें। साथ ही Haut-Uele और Tshopo प्रांतों में भी जरूरी काम न होने पर न जाएं। हालांकि, एक राहत की खबर यह है कि किनशासा के पास एक नाव को क्वारंटाइन किया गया था, जिसमें किसी भी यात्री में इबोला नहीं पाया गया। वहीं पड़ोसी देश युगांडा ने 28 जुलाई 2026 को अपने यहां इबोला के अंत की घोषणा कर दी है। फ्रांस और जर्मनी में भी कुछ मामले आए थे, लेकिन वे लोग अब ठीक हो चुके हैं।