Gurugram में ‘Tower of Justice’ का उद्घाटन, CJI ने महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और चाइल्डकेयर की मांग की

Haryana/Gurugram: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने रविवार, 12 जुलाई 2026 को गुरुग्राम में आधुनिक न्यायिक परिसर ‘Tower of Justice’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर CJI ने इस बात पर जोर दिया कि अदा

Haryana/Gurugram: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने रविवार, 12 जुलाई 2026 को गुरुग्राम में आधुनिक न्यायिक परिसर ‘Tower of Justice’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर CJI ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब से सभी नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और बच्चों की देखभाल के लिए चाइल्डकेयर सेंटर बनाना अनिवार्य होना चाहिए।

यह नया कॉम्प्लेक्स करीब सात एकड़ में फैला है और इसमें 55-56 कोर्ट रूम बनाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत जनवरी 2017 में हुई थी, लेकिन इसे पूरा होने में काफी समय लगा। पुराने जिला कोर्ट परिसर में आग लगने के बाद इस नए भवन की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई थी। निर्माण में देरी की वजह से इस प्रोजेक्ट की लागत 113 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 295 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि Tower of Justice से लोगों को समय पर न्याय मिलेगा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन और ‘ईज ऑफ जस्टिस’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि वकीलों के लिए नए और आधुनिक चैंबर बनाए जाएंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी इस परिसर को आधुनिक न्यायिक बुनियादी ढांचे का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।

इस नए कोर्ट परिसर में आम लोगों और स्टाफ की सुविधा के लिए कई आधुनिक चीजें जोड़ी गई हैं:

सुविधा विवरण
कोर्ट रूम 55-56 कमरे
महिलाओं के लिए लेडीज बार रूम, मदर-एंड-चाइल्ड केयर रूम, क्रेच
सुरक्षा और तकनीक CCTV कंट्रोल रूम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, LAN कनेक्टिविटी
अन्य सेवाएं बैंक, पोस्ट ऑफिस, बार लाइब्रेरी, मेडिएशन सेंटर
पार्किंग 530 वाहनों के लिए जगह
अन्य सुविधा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग लॉक-अप

कार्यक्रम के दौरान CJI सूर्य कांत ने नूंह जिले के तावडु और पुन्हाना में भी नए न्यायिक परिसरों की आधारशिला रखी। उन्होंने पहले भी कई बार कहा है कि कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उनके सम्मान और गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हिस्सा है।