Haryana : हरियाणा सरकार के फंड में हुई 550 करोड़ रुपये से ज्यादा की बड़ी हेराफेरी के मामले में अब CBI ने कमान संभाल ली है। दिल्ली की Economic Offences Branch-III ने इस मामले में नई FIR दर्ज कर ली है। यह घोटाला सरकारी पैस
Haryana : हरियाणा सरकार के फंड में हुई 550 करोड़ रुपये से ज्यादा की बड़ी हेराफेरी के मामले में अब CBI ने कमान संभाल ली है। दिल्ली की Economic Offences Branch-III ने इस मामले में नई FIR दर्ज कर ली है। यह घोटाला सरकारी पैसों को फर्जी कंपनियों के खातों में भेजने से जुड़ा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।
घोटाला कैसे हुआ और किन बैंकों की भूमिका रही
जांच में सामने आया कि सरकारी पैसों को व्यवस्थित तरीके से शेल कंपनियों (फर्जी फर्मों) के खातों में ट्रांसफर किया गया। इसमें बैंकिंग नियमों की जमकर अनदेखी हुई और फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इस मामले में मुख्य रूप से IDFC First Bank और AU Small Finance Bank जांच के दायरे में हैं।
- IDFC First Bank ने कथित तौर पर 583 करोड़ रुपये संबंधित विभागों को वापस कर दिए हैं।
- AU Small Finance Bank ने जांच में पूरी तरह सहयोग नहीं किया है।
- फंड का इस्तेमाल सोना खरीदने और रियल एस्टेट में निवेश के लिए किया गया।
कौन-कौन से अधिकारी और कंपनियां फंसी हैं
इस बड़े फ्रॉड में सरकारी अफसरों से लेकर बैंक मैनेजरों तक के नाम सामने आए हैं। हरियाणा सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई है।
| नाम/संस्था |
भूमिका/स्थिति |
| R.K. Singh और Pradeep Kumar |
दो IAS अधिकारी, जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया |
| Ribhav Rishi और Abhay |
IDFC Bank के मैनेजर, जांच के घेरे में |
| Swastik Desh Project, SRR Planning Gurus |
शेल कंपनियां जिनके खातों में पैसा गया |
| Puspal Paul (ASP) |
CBI के मुख्य जांच अधिकारी |
मामले की कानूनी कार्यवाही और वर्तमान स्थिति
शुरुआत में यह मामला पंचकुला के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने दर्ज किया था। बाद में हरियाणा और केंद्र सरकार की सहमति के बाद इसे CBI को सौंप दिया गया। यह केस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज है, जिसमें धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।