Bihar: BPSC की 72वीं परीक्षा के लिए कड़े नियम, अब गेट पर ही होगा बायोमेट्रिक सत्यापन
Bihar: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (CCE Prelims) को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बहुत सख्त कर दी है। अब अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने से पहले ही गेट पर अपना बायोमेट्रिक
Bihar: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 72वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (CCE Prelims) को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बहुत सख्त कर दी है। अब अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने से पहले ही गेट पर अपना बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। आयोग का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना और इसे पूरी तरह निष्पक्ष बनाना है।
यह परीक्षा 26 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक राज्य के अलग-अलग जिलों में आयोजित की जाएगी। बीपीएससी अध्यक्ष ने 17 जुलाई को सभी जिलाधिकारियों (DMs) और वरीय पुलिस अधीक्षकों (SSPs) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की और साफ कहा कि कदाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय से कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचें, क्योंकि समय सीमा खत्म होने के बाद किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जाएगा।
सुरक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों पर कई स्तरों पर जांच (फ्रिस्किंग) होगी और केवल अधिकृत लोगों को ही परिसर में प्रवेश मिलेगा। तकनीकी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों और जैमर का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनकी हर 15 मिनट में जांच होगी और उनका लॉग भी बनाया जाएगा। फर्जी उम्मीदवारों को पकड़ने के लिए बायोमेट्रिक के साथ-साथ चेहरे की पहचान (फेशियल रिकॉग्निशन) तकनीक का भी उपयोग होगा।
| मुख्य नियम और व्यवस्थाएं | विवरण |
|---|---|
| बायोमेट्रिक सत्यापन | प्रवेश द्वार के बाहर ही अनिवार्य होगा |
| समय का पालन | निर्धारित समय के बाद प्रवेश पूरी तरह बंद |
| सुरक्षा जांच | बहुस्तरीय फ्रिस्किंग और सीसीटीवी निगरानी |
| तकनीकी जांच | जैमर और कैमरों की हर 15 मिनट में चेकिंग |
| कदाचार पर कार्रवाई | तत्काल FIR और भविष्य की परीक्षाओं से बैन |
| प्रवेश अनुमति | केवल अभ्यर्थी और ड्यूटी कर्मी, बाहरी लोग वर्जित |
बता दें कि आयोग ने यह कदम पिछली कुछ परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बाद उठाया है। सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) परीक्षा में हुए बायोमेट्रिक घोटाले और कुछ अन्य केंद्रों पर हुई तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए इस बार प्रोटोकॉल को और ज्यादा मजबूत किया गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने भी पहले धांधली में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार किया है और दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की है।