Mumbai में कम हो रहे मैंग्रोव, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- एक दिन लोग ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घूमेंगे
Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में तेजी से खत्म होते मैंग्रोव (mangrove) वनों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बहुत सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर इसी तरह हरियाली कम होती रही और सही तरीके से नए पेड़ नहीं
Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में तेजी से खत्म होते मैंग्रोव (mangrove) वनों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बहुत सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर इसी तरह हरियाली कम होती रही और सही तरीके से नए पेड़ नहीं लगाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को ऑक्सीजन के लिए सिलेंडर साथ लेकर चलना पड़ेगा। यह बात अदालत ने एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए मैंग्रोव काटने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।
मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने अधिकारियों से पूछा कि काटे गए पेड़ों की जगह लगाए गए नए पौधों की उत्तरजीविता (survival rate) क्या है। कोर्ट ने मौखिक तौर पर कहा कि अधिकारी सिर्फ यह दिखाने के लिए पेड़ लगाते हैं कि उन्होंने कुछ किया है, लेकिन बाद में यह देखने नहीं जाते कि वे पौधे जीवित रहे या नहीं।
मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र राज्य बिजली पारेषण कंपनी लिमिटेड (MSETCL) ने पालघर जिले में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 847 मैंग्रोव पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी। राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने बताया कि सरकार खराब हो चुकी वन भूमि की पहचान कर रही है, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने मुआवजे की राशि जमा कर दी है और सोलापुर जिले में पौधारोपण किया जा रहा है, जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई कि यह क्षेत्र प्रभावित इलाके से बहुत दूर है।
मैंग्रोव के संरक्षण को लेकर कोर्ट पहले भी कई कड़े निर्देश दे चुका है। सितंबर 2018 के एक फैसले में यह अनिवार्य किया गया था कि कोर्ट की अनुमति के बिना मैंग्रोव नहीं काटे जा सकते, क्योंकि यह नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में अदालत ने जिला प्रशासनों को 10,000 हेक्टेयर से अधिक मैंग्रोव भूमि को मैंग्रोव सेल को ट्रांसफर करने की समय सीमा दी थी, लेकिन जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार केवल 955.63 हेक्टेयर जमीन ही ट्रांसफर हो पाई है।
इस मुद्दे पर NGO वनशक्ति ने भी याचिका दायर की है। वहीं, वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के कारण 45,000 से अधिक मैंग्रोव के खतरे में होने और कोली समुदाय के मछुआरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ने की चिंता जताई गई है। चारकोप कोलीवाड़ा सोसाइटी के धीरज भंडारी और मछुआरे मनोहर भंडारी ने बताया कि निर्माण कार्यों के शोर से मछलियों की संख्या कम हो गई है और मछुआरों को इन प्रोजेक्ट्स की पूरी जानकारी नहीं दी जाती।