Maharashtra में कोली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाले ड्राइवर की बर्खास्तगी बरकरार, Bombay High Court ने दिया फैसला
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कोली समुदाय की महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले एक ड्राइवर की नौकरी से बर्खास्तगी को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के प्रति ऐसी
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कोली समुदाय की महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले एक ड्राइवर की नौकरी से बर्खास्तगी को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के प्रति ऐसी घटिया सोच रखने वाले व्यक्ति को किसी भी तरह का इनाम या मुआवजा नहीं दिया जा सकता।
यह पूरा मामला साल 2006 का है, जब Nitin Jaywant Mhatre नाम के एक ड्राइवर ने Uttan Machimar and Vahatuk Sahakari Society Ltd. के ऑफिस में कोली मछुआरों की पत्नियों और बेटियों के बारे में यौन रूप से अश्लील और अपमानजनक बातें कही थीं। इस घटना के बाद सोसाइटी ने जनवरी 2007 में उसे नौकरी से निकाल दिया था।
इस मामले में कानूनी लड़ाई काफी लंबी चली। साल 2015 में Labour Court ने ड्राइवर की बर्खास्तगी को सही माना था, लेकिन 2021 में ठाणे की Industrial Court ने इस फैसले को पलट दिया। इंडस्ट्रियल कोर्ट ने बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए Mhatre को दोबारा नौकरी पर रखने या उसके बदले 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
अब Justice Sandeep V. Marne ने इंडस्ट्रियल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि Mhatre की बातें उन लोगों के लिए अपमानजनक थीं जिनके फायदे के लिए वह काम कर रहा था। जज ने टिप्पणी की कि कर्मचारियों की ऐसी प्रवृत्ति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि संस्था में अनुशासन बना रहे। हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि इंडस्ट्रियल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सबूतों का पुनर्मूल्यांकन किया था।