Finance: Bombay High Court ने टैक्स से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार को एक नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी बनाने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की हाई कोर्ट में एक ही मुद्दे पर सरकारी विभागों के अलग-अलग स्टैंड होने
Finance: Bombay High Court ने टैक्स से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार को एक नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी बनाने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की हाई कोर्ट में एक ही मुद्दे पर सरकारी विभागों के अलग-अलग स्टैंड होने से कानूनी उलझनें बढ़ती हैं। जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने 20 अप्रैल 2026 को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
कोर्ट ने टैक्स पॉलिसी को लेकर क्या कहा?
जस्टिस कुलकर्णी ने अपने फैसले में साफ किया कि जब इनकम टैक्स विभाग अलग-अलग हाई कोर्ट में एक ही मुद्दे पर अलग-अलग बातें करता है, तो इससे ‘Judicial Chaos’ यानी न्यायिक अराजकता पैदा होती है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी एक हाई कोर्ट ने किसी मुद्दे पर अंतिम फैसला दे दिया है, तो विभाग को उसी बात को दूसरी कोर्ट में दोबारा नहीं उठाना चाहिए। इस दौरान कोर्ट ने 1953 के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन चीफ जस्टिस एम.सी. छागला ने भी एक समान टैक्स पॉलिसी की जरूरत बताई थी।
चीनी निर्यातकों को टैक्स में राहत क्यों मिली?
यह पूरा मामला Rika Global Impex Limited बनाम भारत सरकार के बीच था। इसमें चीनी निर्यातकों को RoDTEP स्कीम के तहत रिफंड और फायदे देने से कस्टम विभाग ने मना कर दिया था। विभाग का तर्क था कि चीनी एक ‘प्रतिबंधित’ (restricted) आइटम है, इसलिए इसे फायदे नहीं मिलेंगे। हालांकि, कोर्ट ने इसे गलत पाया क्योंकि सरकार ने कोटा के तहत निर्यात की अनुमति दी थी।
केस से जुड़ी मुख्य बातें
| मुख्य बिंदु |
विवरण |
| केस का नाम |
Rika Global Impex Limited v. Union of India |
| कोर्ट की बेंच |
जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे |
| मुख्य मांग |
नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी बनाना |
| प्रभावित सेक्टर |
चीनी निर्यातक (Sugar Exporters) |
| संदर्भित फैसला |
1953 का चीफ जस्टिस एम.सी. छागला का जजमेंट |