Maharashtra: डॉक्टरों से मारपीट मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, शिव सेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जांच अब DCP करेंगे

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्थानीय पुलिस की जांच पर नाराजगी जताते हुए अब इस केस की जिम्मेदारी DCP रैंक के अधिका

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्थानीय पुलिस की जांच पर नाराजगी जताते हुए अब इस केस की जिम्मेदारी DCP रैंक के अधिकारी को सौंप दी है। अदालत ने म्हात्रे को फटकार लगाते हुए कहा कि आप सार्वजनिक जीवन में हैं और आपका काम जनता की सेवा करना है, फिर आप लोगों को पीटते क्यों हैं।

यह पूरा मामला 6 जुलाई 2026 को डोंबिवली के KDMC अस्पताल में हुआ था। आरोप है कि एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर हुए विवाद के बाद रमेश म्हात्रे और उनके साथियों ने दो डॉक्टरों और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों पर हमला कर दिया था। इस घटना के बाद 8 जुलाई को म्हात्रे और पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, 14 जुलाई को सेशन कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए जमानत आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें दोबारा जेल भेजा गया।

हाई कोर्ट की बेंच, जिसमें एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखद शामिल थे, ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने आरोपी के प्रति बहुत ज्यादा नरम रवैया अपनाया और जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं की। कोर्ट ने यह भी पाया कि रमेश म्हात्रे का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड काफी खराब है, उन पर हत्या और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसे 18 मामले पहले से दर्ज हैं।

27 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतकर्ता डॉक्टर की सुरक्षा के आदेश दिए और उनके बयान वाशिम में BNSS प्रक्रिया के तहत दर्ज करने की अनुमति दी। कोर्ट ने अब DCP को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की पूरी जांच करें और 31 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और कोर्ट को बताया कि कानून होने के बावजूद डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं नहीं रुक रही हैं।