Mumbai: Vile Parle की हाउसिंग सोसायटियों को बड़ी राहत, Bombay High Court ने Conveyance प्रक्रिया में देरी को बताया गलत

Maharashtra: मुंबई की विले पारले (Vile Parle) स्थित तीन हाउसिंग सोसायटियों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि भविष्य में होने वाले TDR (Transferable Development Rights) के इ

Maharashtra: मुंबई की विले पारले (Vile Parle) स्थित तीन हाउसिंग सोसायटियों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि भविष्य में होने वाले TDR (Transferable Development Rights) के इस्तेमाल के नाम पर जमीन के Conveyance की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। इस फैसले से उन सोसायटियों को बड़ी राहत मिली है जो सालों से अपनी जमीन के मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रही थीं।

मामला विले पारले की उन सोसायटियों से जुड़ा है जिनमें 1970 के दशक में बनी 10 इमारतें और नवंबर 1990 में बनी दो इमारतें शामिल हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने डिप्टी रजिस्ट्रार के उस अधिकार को सही ठहराया है, जिसके तहत उन्हें इमारतों के साथ जमीन का ‘unilateral deemed conveyance’ देने का पावर मिलता है। कोर्ट ने कहा कि जमीन के कुछ हिस्सों को सार्वजनिक सुविधाओं के लिए रिजर्व रखा गया है, लेकिन वहां भविष्य में मिलने वाले FSI (Floor Space Index) के फायदे की वजह से मालिकाना हक की प्रक्रिया में देरी करना जायज नहीं है।

इस फैसले का सीधा असर उन हाउसिंग सोसायटियों पर पड़ेगा जो बिल्डर या अन्य कानूनी अड़चनों की वजह से अपनी जमीन का मालिकाना हक नहीं ले पा रही थीं। अब भविष्य के डेवलपमेंट राइट्स या FSI के दावों को आधार बनाकर Conveyance की प्रक्रिया को लटकाया नहीं जा सकेगा।