Disha Salian Case: पिता के शक के बाद भी FIR क्यों नहीं दर्ज हुई, Bombay High Court ने पुलिस से पूछे सवाल

Maharashtra: दिशा सालियन की मौत के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि जब लड़की के पिता ने मौत की परिस्थितियों पर शक जताया था, तो पुलिस ने FIR दर्ज क्यों

Maharashtra: दिशा सालियन की मौत के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि जब लड़की के पिता ने मौत की परिस्थितियों पर शक जताया था, तो पुलिस ने FIR दर्ज क्यों नहीं की। जस्टिस भारती एच डांगरे और जस्टिस मंजुषा ए देशपांडे की बेंच ने यह बात सतीश सालियन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।

सतीश सालियन ने कोर्ट से मांग की है कि इस मामले में FIR दर्ज की जाए और CBI से नई जांच कराई जाए। कोर्ट ने पुलिस से यह भी पूछा कि इस केस को सिर्फ एक हादसा मान लिया गया, जबकि हत्या का शक जताया गया था। साथ ही, कोर्ट ने नाराजगी जताई कि पुलिस ने याचिकाकर्ता को एक्सीडेंटल डेथ (AD) रिपोर्ट से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।

सुनवाई के दौरान पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर भी विवाद हुआ। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर दिशा 14वीं मंजिल से गिरी थीं, तो शुरुआती रिपोर्ट में कोई चोट न होने की बात कैसे कही गई। सरकारी वकील शिशिर हिरय ने कहा कि पुलिस जांच में इसे आत्महत्या माना गया है और गवाहों व तस्वीरों में सिर की चोटें दिख रही हैं। वहीं, दिशा के वकील नीलेश ओझा ने दावा किया कि शुरुआती तस्वीरों में ऐसी कोई चोट नहीं थी और पुलिस ने बाद में फर्जी तस्वीरें जोड़ी हैं।

सतीश सालियन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए इस मामले को दबाया गया और इसमें राजनीतिक दबाव था। याचिका में शिव सेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग भी की गई है। पुलिस का कहना है कि 2020 में ADR दर्ज किया गया था और 2023 की SIT जांच में भी इसे आत्महत्या ही पाया गया।

हाई कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि जब कोई सक्रिय जांच नहीं चल रही है, तो दस्तावेज छिपाने का कोई कारण नहीं है। अब कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूरी घटना की तारीखों और विवरण की लिस्ट मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।