Maharashtra: औरंगाबाद में एक 65 साल के बुजुर्ग व्यक्ति पर पड़ोसी के घर के बाहर सफेद सरसों छिड़कने का आरोप लगा था। इस मामले में पुलिस ने काला जादू विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन अब Bombay High Court ने इस FIR
Maharashtra: औरंगाबाद में एक 65 साल के बुजुर्ग व्यक्ति पर पड़ोसी के घर के बाहर सफेद सरसों छिड़कने का आरोप लगा था। इस मामले में पुलिस ने काला जादू विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किया था, लेकिन अब Bombay High Court ने इस FIR को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ सरसों छिड़कना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुई FIR
यह घटना 11 जून 2025 की है। सुभाष पिंजारकर नाम के व्यक्ति ने अपने पड़ोसी गजानन शेकोकर के खिलाफ Cidco पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि गजानन ने उनके घर के बाहर सफेद सरसों के बीज छिड़के थे। पुलिस ने इस मामले में ‘महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, अनैतिक और अघोरी प्रथाएं और काला जादू रोकथाम अधिनियम, 2013’ की धारा 3(2) के तहत मामला दर्ज किया था।
कोर्ट ने FIR रद्द करते हुए क्या कहा
Justice S.G. Chapalgaonkar ने इस केस की सुनवाई की और पाया कि सिर्फ सरसों छिड़कने के आरोप से इसे काला जादू नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत अपराध तब होता है जब किसी को डराया जाए, उसका शोषण किया जाए या किसी गलत इरादे से कोई अमानवीय काम किया जाए। इस मामले में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि बुजुर्ग व्यक्ति का इरादा किसी को धोखा देना या डराना था।
काला जादू कानून के नियम क्या हैं
कोर्ट ने अपनी कानूनी दलील में बताया कि धारा 3(2) केवल उन कामों पर लागू होती है जिनमें नरबलि, काला जादू या अलौकिक शक्तियों का दावा करके लोगों को ठगने की कोशिश की जाती है। बिना किसी बुरे इरादे या शोषण के किए गए साधारण काम को इस कानून के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने गजानन शेकोकर के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म कर दिया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कोर्ट ने सरसों छिड़कने को अपराध क्यों नहीं माना?
कोर्ट ने कहा कि बिना किसी बुरे इरादे, डर या शोषण के सिर्फ सरसों छिड़कना काला जादू कानून (Black Magic Act) के तहत अपराध नहीं है।
यह मामला किस कानून के तहत दर्ज किया गया था?
यह मामला महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, अनैतिक और अघोरी प्रथाएं और काला जादू रोकथाम अधिनियम, 2013 की धारा 3(2) के तहत दर्ज था।