Maharashtra: विरोध प्रदर्शन के कारण शहर से बाहर निकालने का आदेश रद्द, Bombay High Court ने कहा- क्या नागरिक नारे नहीं लगा सकते

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी के खिलाफ शहर से बाहर निकालने (externment) के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार के किसी फैसले का विरोध करना या नारे लगाना किसी व्यक्ति को उसके

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी के खिलाफ शहर से बाहर निकालने (externment) के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार के किसी फैसले का विरोध करना या नारे लगाना किसी व्यक्ति को उसके इलाके से बाहर निकालने का आधार नहीं हो सकता।

यह मामला SDPI के महाराष्ट्र राज्य महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी से जुड़ा है, जो मुंबई के चेंबूर के रहने वाले हैं। चौधरी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे, जिसके बाद उन पर पांच FIR दर्ज हुई थीं। इसी आधार पर पुलिस उपायुक्त (Zone 6) ने 3 दिसंबर 2025 को उन्हें शहर से बाहर निकालने का आदेश दिया था, जिसे बाद में कोंकण डिवीजन के कमिश्नर ने भी मंजूरी दे दी थी।

जस्टिस माधव जामदार ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को सरकार के फैसलों के खिलाफ विरोध करने और आवाज उठाने का पूरा हक है। जज ने सवाल उठाया कि ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’ और ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने पर किसी को शहर से बाहर क्यों निकाला जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी जनता के सेवक होते हैं और वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं, न कि केवल मंत्रियों के प्रति।

कोर्ट ने इस आदेश को पुलिस शक्तियों का गलत इस्तेमाल (mala fide) बताया। जस्टिस जामदार ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) और अनुच्छेद 21 (सम्मान के साथ जीने का अधिकार) का उल्लंघन है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम नहीं समझा जाना चाहिए।