Maharashtra: मुंबई की एक बांग्लादेशी महिला, जो मानव तस्करी का शिकार हुई थी, अब अपने देश वापस जा सकेगी। Bombay High Court ने बुधवार को उसे तुरंत वापस भेजने (repatriation) का आदेश दिया है। यह महिला जून 2024 में मुंबई के दह
Maharashtra: मुंबई की एक बांग्लादेशी महिला, जो मानव तस्करी का शिकार हुई थी, अब अपने देश वापस जा सकेगी। Bombay High Court ने बुधवार को उसे तुरंत वापस भेजने (repatriation) का आदेश दिया है। यह महिला जून 2024 में मुंबई के दहिसर इलाके में एक छापेमारी के दौरान बचाई गई थी।
कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा और क्या आदेश दिया?
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने पाया कि महिला को वापस भेजने में छह महीने से ज्यादा की देरी हुई है। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार की इस सुस्ती पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने साफ किया कि एक वयस्क महिला को वापस भेजने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत नहीं है, केवल ट्रायल कोर्ट से ‘नो ऑब्जेक्शन’ मिलना काफी है। अब महिला को यह वचन देना होगा कि वह भविष्य की अदालती कार्यवाही में ऑनलाइन (virtually) शामिल होगी।
इस केस से जुड़ी मुख्य बातें क्या हैं?
- बचाव: महिला को 8 जून 2024 को दहिसर, मुंबई से रेस्क्यू किया गया था।
- मामला: यह केस Immoral Traffic (Prevention) Act और Pocso Act के तहत दर्ज था।
- पारिवारिक स्थिति: महिला की बांग्लादेश में एक छह साल का बेटा है।
- धोखाधड़ी: Rescue Foundation के वकील ने बताया कि महिला को नौकरी का लालच देकर भारत लाया गया था।
वापसी की प्रक्रिया और नियम क्या हैं?
| विवरण |
जानकारी |
| SOP नियम |
महाराष्ट्र का रिपेट्रिएशन SOP मार्च 2009 से लागू है |
| भारत-बांग्लादेश MoU |
तस्करी रोकने और वापसी के लिए 2015 में समझौता हुआ |
| MHA गाइडलाइन |
मजबूरी में लाए गए विदेशी पीड़ितों पर Foreigners Act नहीं लगेगा |
| जरूरी दस्तावेज |
केंद्र सरकार की अनुमति और बांग्लादेशी सरकार का ट्रैवल परमिट |