Maharashtra में RTE रिफंड में देरी पर Bombay High Court सख्त, राज्य सरकार से पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने को कहा
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को Right to Education (RTE) के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के बदले रिफंड देने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह रिफंड की मौजूद
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को Right to Education (RTE) के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के बदले रिफंड देने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह रिफंड की मौजूदा व्यवस्था की पूरी तरह से समीक्षा करे ताकि स्कूलों को समय पर पैसा मिल सके।
जस्टिस रियाज चागला और जस्टिस फरहान दुभाष ने सुनवाई के दौरान पाया कि रिफंड न मिलने की वजह से अदालतों में केस बढ़ रहे हैं। सिर्फ 1 जनवरी से 6 अगस्त के बीच ही ऐसे 133 केस फाइल किए गए थे। कोर्ट ने साफ किया कि RTE एक्ट और आर्टिकल 21-A के तहत पिछड़े वर्ग के छात्रों की फीस चुकाना राज्य सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कुछ अहम निर्देश दिए हैं। 7 अगस्त को एक सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने भरोसा दिलाया कि तीन स्कूलों का 2018-19 से बकाया करीब 3.6 करोड़ रुपये अगले चार हफ्ते में दे दिए जाएंगे। इससे पहले 22 जुलाई को नागपुर बेंच ने भी सरकार को छह हफ्ते के भीतर लंबित दावों को निपटाने का आदेश दिया था।
स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने माना कि करीब 3,000 करोड़ रुपये का रिफंड बकाया है और यह बात काफी हद तक सच है। उन्होंने कहा कि फंड उपलब्ध होने पर यह पैसा किस्तों में दिया जाएगा। हालांकि, निजी स्कूलों का कहना है कि साल 2025-26 के लिए तय की गई 17,670 रुपये प्रति छात्र की रिफंड राशि बहुत कम है।
इस देरी का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी दिख रहा है। पिछले चार सालों से निजी स्कूलों में RTE के तहत दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन की संख्या कम हुई है। स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के मुताबिक पिछले दस सालों में करीब 2,500 करोड़ रुपये का बकाया था, जिससे स्कूलों के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।