Maharashtra: कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद मैटरनिटी लीव का हक नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद कोई भी कर्मचारी मैटरनिटी बेनिफिट (प्रसूति लाभ) का दावा नहीं कर सकता। यह मामला विद्याविहार के एक कॉलेज की पूर्व एडहॉक असिस्टेंट प्रो

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद कोई भी कर्मचारी मैटरनिटी बेनिफिट (प्रसूति लाभ) का दावा नहीं कर सकता। यह मामला विद्याविहार के एक कॉलेज की पूर्व एडहॉक असिस्टेंट प्रोफेसर से जुड़ा है, जिन्हें कोर्ट ने मैटरनिटी लीव और उससे मिलने वाले पैसों का हकदार नहीं माना है।

पूरा मामला इस बात पर टिका था कि प्रोफेसर का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका था या नहीं। महिला प्रोफेसर ने जनवरी 2023 से अप्रैल 2024 तक दो बार एडहॉक कार्यकाल पर काम किया था। उन्होंने 27 मार्च 2024 को मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन किया था और जून 2024 से छुट्टी मांगी थी। लेकिन उनका कॉन्ट्रैक्ट 30 अप्रैल 2024 को खत्म हो गया और कॉलेज ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने जून 2024 में बच्चे को जन्म दिया, जब वह कॉलेज की कर्मचारी नहीं रह गई थीं।

इससे पहले लेबर अथॉरिटी ने प्रोफेसर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कॉलेज को 2,43,500 रुपये देने और उनकी नौकरी न निकालने का आदेश दिया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने साफ किया कि मैटरनिटी बेनिफिट तभी मिलता है जब नियोक्ता (Employer) और कर्मचारी के बीच रिश्ता बना रहे।

कोर्ट ने कहा कि कॉलेज ने महिला की गर्भावस्था की वजह से उन्हें नौकरी से नहीं निकाला और न ही उनका कॉन्ट्रैक्ट समय से पहले खत्म किया। कॉन्ट्रैक्ट का खत्म होना एक सामान्य प्रक्रिया थी, न कि कोई भेदभावपूर्ण कार्रवाई। कोर्ट ने माना कि जब महिला जून 2024 में मां बनीं, तब वह कॉलेज की कर्मचारी नहीं थीं, इसलिए वह मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के तहत किसी भी लाभ की हकदार नहीं हैं।