Dombivli में डॉक्टरों से मारपीट मामला, कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे समेत 4 को दी जमानत, महाराष्ट्र से बाहर रहने की शर्त
Maharashtra: डोंबिवली के शास्त्री नगर म्युनिसिपल अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शिवसेना पार्षद Ramesh Mhatre और तीन अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है,
Maharashtra: डोंबिवली के शास्त्री नगर म्युनिसिपल अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शिवसेना पार्षद Ramesh Mhatre और तीन अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है, लेकिन साथ ही इस मामले की सुनवाई को फास्ट ट्रैक मोड पर चलाने का आदेश दिया है।
यह पूरा विवाद 6 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था, जब एक महिला डॉक्टर समेत कई डॉक्टरों पर हमला किया गया था। इस मामले में रमेश म्हात्रे को 8 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, कल्याण की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें पहले जमानत दे दी थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे गलत बताते हुए म्हात्रे को सरेंडर करने का आदेश दिया था। अब 7 अगस्त 2026 को कोर्ट ने कड़ी शर्तों के साथ उन्हें जमानत दी है।
कोर्ट ने जमानत के लिए बहुत सख्त शर्तें रखी हैं। सभी चारों आरोपियों को आदेश दिया गया है कि जब तक ट्रायल शुरू नहीं होता या चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, वे महाराष्ट्र राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे। Ramesh Mhatre को उत्तर गोवा के Nazri Resort में रहने को कहा गया है और उन्हें हफ्ते में तीन बार वहां की स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करना होगा। बाकी तीन आरोपी रमेश पवार, प्रमोद उर्फ प्रकाश निकम और अक्षय करंडे पास के ही एक गेस्ट हाउस में रहेंगे।
कोर्ट ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई और कहा कि लोकतंत्र में एक जनप्रतिनिधि जनता के लिए होता है, अगर वह अपने ही वोटरों (डॉक्टरों) पर हमला करता है, तो इससे लोकतंत्र की नींव कमजोर होती है। जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखद की बेंच ने राज्य सरकार को इस केस के लिए एक अनुभवी स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चार्जशीट दाखिल होने के एक हफ्ते के भीतर ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने होंगे। आरोपियों को गवाहों या शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने की मनाही है। वहीं, कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) को आदेश दिया गया है कि घटना के बाद काम से अनुपस्थित रहे डॉक्टरों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए। साथ ही, तीन डॉक्टरों को सुरक्षा देने का भी आदेश दिया गया है।