विदेश से की गई Law की डिग्री मान्य नहीं, Bombay High Court ने 3 साल वाले LLB एडमिशन पर लगाया रोक

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि विदेश की यूनिवर्सिटी से ली गई तीन साल की लॉ डिग्री को भारत में 3 साल वाले LLB कोर्स के लिए ‘पहली डिग्री’ नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने एक छात्र

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि विदेश की यूनिवर्सिटी से ली गई तीन साल की लॉ डिग्री को भारत में 3 साल वाले LLB कोर्स के लिए ‘पहली डिग्री’ नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने एक छात्र की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने एडमिशन रद होने को चुनौती दी थी।

पूरा मामला Yohaan Abraham नाम के एक छात्र से जुड़ा है, जिसने 2019 में 12वीं पास करने के बाद London की Queen Mary University से तीन साल की लॉ डिग्री ली थी। इसके बाद उन्होंने Panvel की Chhatrapati Shivaji Maharaj University (CSM University) में 3 साल वाले LLB कोर्स में एडमिशन लिया। यूनिवर्सिटी ने पहले उन्हें प्रोविजनल एडमिशन दिया लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया, जिसके बाद यह मामला कोर्ट पहुँचा।

जस्टिस R.I. Chagla और जस्टिस Farhan P. Dubash की बेंच ने साफ किया कि भारत में 3 साल का LLB कोर्स एक ‘सेकंड स्टेज’ डिग्री है। इसका मतलब यह है कि इसे करने के लिए पहले किसी भी विषय में ग्रेजुएशन (Bachelor’s Degree) होना जरूरी है। कोर्ट ने Advocates Act, 1961 और Legal Education Rules, 2008 का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी यूनिवर्सिटी की तीन साल की डिग्री, जो सीधे 12वीं के बाद की गई हो, उसे ग्रेजुएशन की डिग्री मानकर दोबारा LLB में एडमिशन नहीं लिया जा सकता।

Bar Council of India (BCI) की तरफ से वकील Yogesh Naidu ने भी कोर्ट में यही दलील दी कि भारत में ग्रेजुएशन के बाद ही 3 साल वाला लॉ कोर्स किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी डिग्री को कुछ रेगुलेटरी कामों के लिए मान्यता दी जा सकती है, लेकिन वह भारत में LLB एडमिशन के लिए जरूरी ‘पहली डिग्री’ की जगह नहीं ले सकती।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि इस फैसले से छात्र के लिए रास्ते बंद नहीं हुए हैं। अगर वह भारत में वकील के तौर पर प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो वह Bridge Course या BCI की Qualifying Examination जैसे अन्य विकल्पों को चुन सकते हैं।