Maharashtra: सिर्फ प्राइवेट रेस्टोरेंट ही क्यों? Bombay HC की फटकार के बाद सरकारी कैंटीन की जांच करने पहुंची FDA टीम
Maharashtra: महाराष्ट्र में खाने-पीने की दुकानों की सफाई को लेकर चल रही कार्रवाई अब सरकारी दफ्तरों तक पहुंच गई है। Bombay High Court ने सवाल उठाया कि क्या FDA सिर्फ प्राइवेट रेस्टोरेंट्स को निशाना बना रहा है या सरकारी कै
Maharashtra: महाराष्ट्र में खाने-पीने की दुकानों की सफाई को लेकर चल रही कार्रवाई अब सरकारी दफ्तरों तक पहुंच गई है। Bombay High Court ने सवाल उठाया कि क्या FDA सिर्फ प्राइवेट रेस्टोरेंट्स को निशाना बना रहा है या सरकारी कैंटीन में भी ऐसी ही जांच हो रही है। कोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी के बाद FDA की टीम ने हाई कोर्ट परिसर के अंदर चल रहे कैंटीनों का निरीक्षण किया है।
मामला तब शुरू हुआ जब 29 जुलाई को एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस गौतम ए अंखाड़ की बेंच ने पूछा कि क्या मंत्रालय और विधान भवन जैसी जगहों की कैंटीन की जांच हुई है। कोर्ट ने FDA से इस पर रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद 30 जुलाई को FDA की टीम हाई कोर्ट के तीन कैंटीनों में पहुंची। जांच में एक कैंटीन बिना FSSAI लाइसेंस के चल रहा था, जिसे तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया। बाकी दो कैंटीनों को कमियां सुधारने के लिए नोटिस जारी किया गया।
हैरानी की बात यह रही कि FDA ने कोर्ट को बताया कि मंत्रालय और विधान भवन की कैंटीन 98% नियमों का पालन कर रही हैं। कोर्ट को यह बात सही नहीं लगी और उसने चार वकीलों की एक टीम को मंत्रालय कैंटीन भेजने का फैसला किया। जब वकीलों ने वहां जाकर देखा तो पाया कि वहां सफाई की हालत बहुत खराब थी। कोर्ट ने FDA की इस रिपोर्ट को ‘झूठा’ बताया और उन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए जिन्होंने गलत रिपोर्ट तैयार की थी।
कोर्ट ने साफ कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और कोई भी VVIP कानून से ऊपर नहीं है। FDA को निर्देश दिया गया है कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी जगह एक जैसे नियम लागू करे। प्राइवेट रेस्टोरेंट्स की तरह सरकारी कैंटीनों को भी सुधार के लिए नोटिस दिया जाए और 5 अगस्त तक दोबारा जांच पूरी की जाए। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
दूसरी तरफ, कई होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से शिकायत की है। उनका कहना है कि FDA बिना सुधार का मौका दिए सीधे लाइसेंस रद्द कर रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। फूड सेफ्टी एक्ट के मुताबिक लाइसेंस रद्द करने से पहले 14 दिन का नोटिस देना जरूरी होता है।