Dombivli में डॉक्टरों के साथ मारपीट मामला, Bombay High Court ने Shiv Sena पार्षद समेत 4 को दी जमानत, ट्रायल होगा फास्ट ट्रैक
Maharashtra/Dombivli: बॉम्बे हाई कोर्ट ने डोंबिवली के शास्त्री नगर म्युनिसिपल हॉस्पिटल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शिव सेना पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को जमान
Maharashtra/Dombivli: बॉम्बे हाई कोर्ट ने डोंबिवली के शास्त्री नगर म्युनिसिपल हॉस्पिटल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शिव सेना पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है, लेकिन साथ ही इस केस की सुनवाई को फास्ट ट्रैक पर रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि आरोपियों को ट्रायल शुरू होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहना होगा।
यह पूरा मामला 6 जुलाई 2026 का है जब अस्पताल में महिला डॉक्टर समेत अन्य डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई थी। इस घटना के बाद एक महिला डॉक्टर ने डर के कारण इस्तीफा तक दे दिया था। इससे पहले कल्याण कोर्ट ने रमेश म्हात्रे को जमानत दे दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इस आदेश को गलत बताया और कहा कि मजिस्ट्रेट ने आरोपी के आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज किया और मामले को हल्के में लिया।
एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखद की बेंच ने इस पर सख्त टिप्पणी की। जस्टिस घुगे ने कहा कि लोकतंत्र में एक चुना हुआ प्रतिनिधि जनता के लिए होता है, और अगर वह अपने ही वोटरों (डॉक्टरों) पर हमला करता है, तो इससे लोकतंत्र और जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचता है।
कोर्ट ने जमानत के लिए बहुत कड़ी शर्तें रखी हैं। रमेश म्हात्रे और अन्य तीन आरोपी रमेश पवार, प्रमोद उर्फ प्रकाश निकम और अक्षय करंडे को फिलहाल गोवा जाना होगा। म्हात्रे उत्तरी गोवा के एक रिसॉर्ट में रहेंगे और बाकी आरोपी पास के एक गेस्ट हाउस में रहेंगे। वे केवल चार्ज फ्रेम होने के बाद ही महाराष्ट्र लौट सकते हैं। म्हात्रे को अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा और वे किसी भी गवाह या पीड़ित से संपर्क नहीं कर सकते।
हाई कोर्ट ने केस को जल्दी खत्म करने के लिए एक सख्त टाइमलाइन तय की है:
| काम | समय सीमा |
|---|---|
| वॉयस और वीडियो सैंपल लैब भेजना | 3 वर्किंग दिन |
| फॉरेंसिक रिपोर्ट जमा करना | 15 दिन (22 अगस्त तक) |
| चार्जशीट दाखिल करना | रिपोर्ट के 10 दिन बाद |
| चार्ज फ्रेम करना | चार्जशीट के 5 दिन बाद |
| स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति | 15 दिन |
| ट्रायल पूरा करना | चार्ज फ्रेम होने के 3 महीने के भीतर |
कोर्ट ने रजिस्ट्री को 7 दिनों के भीतर इस फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए जज तय करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को एक अनुभवी स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने को कहा गया है, जिन्हें कोर्ट की अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकेगा।