Maharashtra: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में गोदरेज एंड बॉयस को झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंपनी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कंपनी व
Maharashtra: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में गोदरेज एंड बॉयस को झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंपनी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कंपनी विक्रोली इलाके में अपनी 10 एकड़ जमीन के लिए मिले मुआवजे को बहुत कम बता रही थी और इसे बढ़वाने की मांग कर रही थी।
मुआवजे को लेकर क्या है पूरा विवाद?
गोदरेज एंड बॉयस को विक्रोली स्थित उनकी जमीन के लिए 264 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था। कंपनी का कहना है कि यह रकम बहुत कम है और उन्हें इसके बदले 993 करोड़ रुपये मिलने चाहिए। कंपनी ने पहले 2019 में भी अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें केवल मुआवजे की राशि बढ़वाने के लिए LARRA (Land Acquisition Rehabilitation and Resettlement Authority) में जाने की अनुमति दी थी।
कोर्ट ने याचिकाओं को क्यों खारिज किया?
जस्टिस मनीष पिताले और जस्टिस श्रीराम शिरसाट की बेंच ने दो मुख्य बिंदुओं पर फैसला सुनाया। पहला, कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा LARRA के सामने देरी से लिखित बयान दाखिल करने की अनुमति को सही माना। दूसरा, NHSRCL को सुनवाई के बीच में अपने बयान में बदलाव करने की अनुमति देने के फैसले को भी बरकरार रखा। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में बहुत ज्यादा तकनीकी बातों में नहीं पड़ना चाहिए और कंपनी को अब मेरिट के आधार पर अपना केस लड़ना चाहिए।
केस से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| विवरण |
जानकारी |
| जमीन का स्थान |
विक्रोली, मुंबई (10 एकड़) |
| दिया गया मुआवजा |
264 करोड़ रुपये |
| मांगा गया मुआवजा |
993 करोड़ रुपये |
| फैसले की तारीख |
24 अप्रैल, 2026 |
| संबंधित अथॉरिटी |
NHSRCL और LARRA |