Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: मैंग्रोव काटने पर बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- लोग ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर घूमेंगे

Maharashtra: मुंबई और आसपास के इलाकों में तेजी से घटते हरे कवर को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि एक ऐसा दिन दूर नहीं जब लोगों को सांस लेने के लिए हर तीन घंटे में ऑक्सीजन सिलेंडर का सहारा लेना पड़

Maharashtra: मुंबई और आसपास के इलाकों में तेजी से घटते हरे कवर को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि एक ऐसा दिन दूर नहीं जब लोगों को सांस लेने के लिए हर तीन घंटे में ऑक्सीजन सिलेंडर का सहारा लेना पड़ेगा। यह टिप्पणी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए बिजली की लाइन बिछाने के लिए मैंग्रोव के पेड़ काटने की अनुमति मांगने वाली एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आई।

मामला महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड (MSETCL) की एक याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने पालघर जिले के डहाणू से अंबसरी तक ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए 847 मैंग्रोव पेड़ काटने की इजाजत मांगी है। इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 3.35 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल किया जाना है, जिसमें 1.9656 हेक्टेयर मैंग्रोव वन शामिल हैं। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अधिकारी केवल पेड़ लगाने का दिखावा करते हैं, लेकिन यह नहीं देखते कि वे पौधे जीवित रहे या नहीं।

राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने मुआवजे की राशि जमा कर दी है और सोलापुर जिले में मैंग्रोव के बदले पौधारोपण किया जा रहा है। वहीं, MSETCL के वकील अमोघ सिंह ने कहा कि अक्टूबर में प्रधानमंत्री द्वारा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के उद्घाटन की संभावना है, इसलिए इस काम को जल्द पूरा करना जरूरी है। कोर्ट ने अब इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी।

दूसरी ओर, इसी प्रोजेक्ट से जुड़ा एक मामला गुजरात हाई कोर्ट में भी चल रहा है। National High Speed Rail Corporation Limited (NHSRCL) ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की है। यह अपील जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर है, जहाँ LARR अथॉरिटी ने किसानों को ज्यादा मुआवजा देने का आदेश दिया था। NHSRCL का कहना है कि अगर यह आदेश लागू रहा, तो प्रोजेक्ट पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।