Maharashtra: Bombay High Court ने एक 17 साल की लड़की, जिसके साथ यौन शोषण हुआ था, उसकी 25 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने लड़की की निजी पसंद को सही माना और कहा कि वह अपनी मर्जी से यह फैसला ले
Maharashtra: Bombay High Court ने एक 17 साल की लड़की, जिसके साथ यौन शोषण हुआ था, उसकी 25 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने लड़की की निजी पसंद को सही माना और कहा कि वह अपनी मर्जी से यह फैसला ले रही है। इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रजनन संबंधी फैसलों में किसी बाहरी दबाव की जगह नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया और क्या था मामला?
लड़की की वकील Pranali Kakade ने 13 मई 2026 को कोर्ट से मदद मांगी थी। इसके बाद 14 मई को कोर्ट ने JJ Hospital के डीन को एक मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया। 18 मई को मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि लड़की मेडिकल तौर पर प्रेग्नेंसी खत्म करने (MTP) के लिए फिट है। जस्टिस Gautam Ankhad और Sandesh Patil ने कहा कि MTP कानून में किसी भी परिवार या पार्टनर के हस्तक्षेप की जगह नहीं है और यह आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।
MTP कानून और सुप्रीम कोर्ट की राय क्या है?
Medical Termination of Pregnancy (MTP) कानून के 2021 के संशोधन के अनुसार, यौन शोषण पीड़ित महिलाओं और नाबालिगों के लिए गर्भपात की समय सीमा 24 हफ्ते तक है। 24 हफ्ते से ज्यादा होने पर कोर्ट की अनुमति और मेडिकल बोर्ड की सलाह जरूरी होती है। इसी बीच, 30 अप्रैल 2026 को Supreme Court ने भी केंद्र सरकार से कहा था कि रेप पीड़ितों के लिए गर्भपात की समय सीमा पूरी तरह हटा देनी चाहिए ताकि उन्हें अनचाही प्रेग्नेंसी का बोझ न उठाना पड़े।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MTP कानून के तहत समय सीमा क्या है?
MTP (संशोधन) अधिनियम 2021 के तहत नाबालिगों और यौन शोषण पीड़ित महिलाओं के लिए गर्भपात की समय सीमा 24 हफ्ते तक है। इससे अधिक समय होने पर न्यायिक अनुमति की आवश्यकता होती है।
इस मामले में कोर्ट ने क्या महत्वपूर्ण बात कही?
कोर्ट ने कहा कि गर्भपात कराने या न कराने का फैसला पूरी तरह गर्भवती महिला की निजी पसंद होती है और इसमें परिवार या पार्टनर का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।