Maharashtra में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए कटेंगे 847 मैंग्रोव पेड़, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी मंजूरी

Maharashtra: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़ी एक ट्रांसमिशन लाइन और सबस्टेशन के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने 847 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने इसे एक विशेष मामला माना है और साफ कहा है कि भव

Maharashtra: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़ी एक ट्रांसमिशन लाइन और सबस्टेशन के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने 847 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने इसे एक विशेष मामला माना है और साफ कहा है कि भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए इसे मिसाल नहीं बनाया जाएगा। यह फैसला नेशनल इंपॉर्टेंस यानी राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट को देखते हुए लिया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंखाड की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि मैंग्रोव जैसे तटीय पेड़ों को काटकर सैकड़ों किलोमीटर दूर सोलापुर जैसे इलाकों में पेड़ लगाना असली मुआवजा नहीं है। कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि तटीय इलाकों के पेड़ों की जगह उसी तरह के तटीय वातावरण में ही नए पेड़ लगाए जाने चाहिए।

अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि पेड़ लगाने की ट्रैकिंग सिस्टम में सुधार के लिए सरकार को चार हफ्ते का समय दिया गया है। इससे पहले जुलाई 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने चिंता जताई थी कि अगर इसी तरह हरियाली खत्म होती रही, तो भविष्य में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा।

इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 3.35 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिसमें करीब दो हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र शामिल है। यह पूरी प्रक्रिया महाट्रांसको (MahaTransco) द्वारा संचालित की जा रही है, जिसने 132 KV ट्रांसमिशन लाइन के लिए यह अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पेड़ों की संख्या पूरी करना काफी नहीं है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को बहाल करना जरूरी है।