Mumbai में कोर्ट का बड़ा फैसला, बेटी के जन्म प्रमाण पत्र में पिता का नाम बदलने की मिली मंजूरी

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी बेटी के बर्थ सर्टिफिकेट में सुधार करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब प्रमाण पत्र में पूर्व पति की जगह बच्चे के जैविक पिता (Bio

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसकी बेटी के बर्थ सर्टिफिकेट में सुधार करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब प्रमाण पत्र में पूर्व पति की जगह बच्चे के जैविक पिता (Biological Father) का नाम दर्ज किया जाए। इसके लिए कोर्ट ने BMC को नया दस्तावेज जारी करने का निर्देश दिया है।

यह मामला काफी पुराना था। बच्ची का जन्म दिसंबर 2009 में हुआ था। उस समय महिला शादीशुदा थी लेकिन अपने पति से अलग रह रही थी। उस दौरान एक अन्य व्यक्ति के साथ उसके संबंधों से बच्ची का जन्म हुआ। मार्च 2010 में जब बर्थ सर्टिफिकेट बना, तब उसमें महिला के तत्कालीन पति का नाम दर्ज कर दिया गया था। बाद में महिला ने तलाक लिया और जैविक पिता से शादी कर ली।

महिला ने जब इस गलती को सुधारने के लिए Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) से संपर्क किया, तो BMC ने नाम बदलने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने वकील उदय वारुंजिकर के जरिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस रंजितसिन्हा भोंसले की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

कोर्ट ने अपने फैसले में DNA रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया, जिससे यह साफ हो गया कि बच्ची का असली पिता कौन है। साथ ही जैविक माता और पिता द्वारा दिए गए हलफनामों को भी देखा गया, जिसमें उन्होंने खुद को बच्चे का असली माता-पिता बताया था। इन सबूतों के आधार पर कोर्ट ने BMC को नया जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है।