Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर पत्नी घर के काम जैसे खाना बनाना या सफाई नहीं करती है, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि शादी बराबरी की साझेदारी है, कोई सर्विस क
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर पत्नी घर के काम जैसे खाना बनाना या सफाई नहीं करती है, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि शादी बराबरी की साझेदारी है, कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट नहीं और पत्नियां ‘नौकरानी’ नहीं होती हैं। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट का फैसला?
यह मामला एक पति (K.B.C.) और पत्नी (B.S.C.) से जुड़ा है। साल 2010 में बांद्रा फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया था और पत्नी को मेंटेनेंस देने से मना कर दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस पुराने फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने कहा कि घरेलू कामकाज को लेकर होने वाले मामूली झगड़े हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत क्रूरता की श्रेणी में नहीं आते।
किन बातों को कोर्ट ने ‘नॉर्मल’ माना?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिए क्रूरता का स्तर बहुत गंभीर होना चाहिए, जिससे साथ रहना नामुमकिन हो जाए। हाई कोर्ट ने निम्नलिखित बातों को शादी की सामान्य खींचतान माना और इन्हें तलाक का आधार नहीं माना:
- खाना न बनाना या घर का काम न करना।
- ससुराल वालों के साथ रूखा व्यवहार करना।
- बार-बार अपने मायके जाना।
मेंटेनेंस को लेकर क्या आदेश आया?
कोर्ट ने पाया कि पति एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) है और उसकी कमाई अच्छी है, इसलिए वह पत्नी का खर्च उठा सकता है। हाई कोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को हर महीने 10,000 रुपये मेंटेनेंस और रहने के लिए अलग से 10,000 रुपये दे। फैमिली कोर्ट के उस फैसले को गलत बताया गया जिसमें कहा गया था कि पत्नी आर्ट और क्राफ्ट क्लास चलाती है, इसलिए वह अपना खर्च खुद उठा सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या घर का काम न करना तलाक का आधार बन सकता है?
बॉम्बे हाई कोर्ट के अनुसार, केवल खाना बनाने या सफाई न करने जैसे घरेलू कामों की विफलता को मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता और यह तलाक का कानूनी आधार नहीं बनता है।
कोर्ट ने मेंटेनेंस के तौर पर कितनी राशि तय की है?
हाई कोर्ट ने पति को निर्देश दिया है कि वह पत्नी को 10,000 रुपये मासिक मेंटेनेंस और 10,000 रुपये रहने के खर्च के तौर पर हर महीने दे।