ONGC को लगा बड़ा झटका, Bombay High Court ने बरकरार रखा 24.7 मिलियन डॉलर का जुर्माना
Maharashtra: सरकारी कंपनी ONGC को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन (ICA) के फैसले को सही ठहराते हुए ONGC को 24.7 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश बरकरार रखा है। जस्ट
Maharashtra: सरकारी कंपनी ONGC को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन (ICA) के फैसले को सही ठहराते हुए ONGC को 24.7 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश बरकरार रखा है। जस्टिस संदीप मार्णे ने इस मामले की सुनवाई की और स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय फैसलों में कोर्ट दखल नहीं दे सकता।
यह पूरा विवाद साल 2015 में ONGC और मलेशियाई कंपनी Sapura Fabrication (अब VTEB Fabrication) के बीच हुए एक कॉन्ट्रैक्ट से शुरू हुआ था। यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई हाई साउथ फील्ड के पुनर्विकास के लिए ऑफशोर काम करने को लेकर था। काम पूरा होने के बाद Sapura ने अतिरिक्त काम के लिए छह दावे पेश किए थे।
मई 2024 में एक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह कर रहे थे, अपना फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल ने Sapura के छह में से पांच दावों को सही माना और ONGC पर जुर्माना लगाया। ONGC ने इस फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल ने कुछ जरूरी कागजातों और मीटिंग्स की बातों को नजरअंदाज किया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल जुर्माना राशि | 24.7 मिलियन डॉलर + ब्याज |
| अतिरिक्त लागत | लगभग ₹1.88 करोड़ |
| विवाद का कारण | मुंबई हाई साउथ फील्ड का ऑफशोर काम |
| कानूनी आधार | Arbitration and Conciliation Act, 1996 की धारा 34 |
| फैसले की तारीख | 19 जून, 2026 |
कोर्ट ने कहा कि Arbitration Act की धारा 34(2A) के तहत अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन के फैसलों को ‘पेटेंट इलीगैलिटी’ के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने माना कि भले ही कोई फैसला गलत लगे, लेकिन कानूनन अंतरराष्ट्रीय फैसलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं है। इसी वजह से कोर्ट ने ONGC की याचिका खारिज कर दी और जुर्माने की राशि को सही माना।