Maharashtra: मुंबई की सड़कों पर अवैध रूप से दुकान लगाने वाले फेरीवालों की समस्या अब कोर्ट तक पहुंच गई है। Bombay High Court ने राज्य सरकार और नगर निगम (BMC) की ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार जो
Maharashtra: मुंबई की सड़कों पर अवैध रूप से दुकान लगाने वाले फेरीवालों की समस्या अब कोर्ट तक पहुंच गई है। Bombay High Court ने राज्य सरकार और नगर निगम (BMC) की ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार जो कदम उठा रही है, वह सिर्फ एक दिखावा (eyewash) है और आम जनता का जीवन इन अवैध फेरीवालों की वजह से मुश्किल हो गया है।
कोर्ट ने सरकार के किन दावों को नकारा
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने सरकार द्वारा पेश किए गए एक प्रस्ताव (GR) को ‘लिप सर्विस’ बताया। सरकार ने स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 को लागू करने के लिए एक कमेटी बनाने का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने बहुत देर से लिया गया कदम माना। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि 9,000 से ज्यादा फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कितना सच है।
BMC और पुलिस के बीच खींचतान
सुनवाई के दौरान BMC के वकील चैतन्य चव्हाण ने कहा कि नगर निगम नियमित रूप से कार्रवाई करता है, लेकिन पुलिस की मदद के बिना फेरीवालों को रोकना मुश्किल है क्योंकि वे कार्रवाई के तुरंत बाद वापस आ जाते हैं। वहीं कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने इन अवैध वेंडरों, जिनमें कुछ कथित तौर पर बांग्लादेशी भी हैं, को हटाने के पुराने आदेशों को लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।
आम जनता और दुकानदारों पर असर
कोर्ट ने कहा कि अवैध कब्जे की वजह से कानून का पालन करने वाले दुकानदारों और पैदल चलने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है। Goregaon Merchants Association की ओर से दलील दी गई कि फेरीवालों की वजह से हिंसा और उत्पीड़न बढ़ रहा है। कोर्ट ने अब राज्य सरकार से पूछा है कि क्या वे इस समस्या को गंभीरता से सुलझाना चाहते हैं और अगले हफ्ते इस पर दोबारा जवाब मांगा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Street Vendors Act 2014 क्या है?
यह एक केंद्रीय कानून है जिसका मकसद शहरी फेरीवालों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके काम को रेगुलेट करना है। इसके तहत टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) बनाना और वेंडिंग जोन तय करना जरूरी होता है।
कोर्ट ने सरकार के GR को ‘eyewash’ क्यों कहा?
क्योंकि सरकार ने कमेटी बनाने के लिए छह महीने का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने बहुत देरी से लिया गया और केवल औपचारिकता निभाने वाला कदम माना।