Maharashtra: सरकार और मंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी क्यों नहीं कर सकते नागरिक, Bombay HC ने पुलिस से पूछे सवाल

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल किया है कि क्या आम नागरिक सरकार या मंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी नहीं कर सकते। जस्टिस माधव जामदार ने एक पूर्व लोकसभ

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल किया है कि क्या आम नागरिक सरकार या मंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी नहीं कर सकते। जस्टिस माधव जामदार ने एक पूर्व लोकसभा उम्मीदवार के खिलाफ लगाए गए तड़ीपार (externment) के आदेश को रद्द कर दिया है।

यह पूरा मामला सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी से जुड़ा है, जो Socialist Democratic Party of India (SDPI) के महासचिव हैं। मुंबई पुलिस ने उन्हें पिछले साल अक्टूबर में मुंबई और आसपास के इलाकों से एक साल के लिए तड़ीपार कर दिया था। पुलिस ने यह कदम इसलिए उठाया था क्योंकि वे ‘BJP सरकार मुर्दाबाद’ और ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगा रहे थे।

जस्टिस माधव जामदार ने इस फैसले को ‘mala fide’ यानी गलत इरादे से लिया गया बताया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सरकारी फैसलों का विरोध करना या नारेबाजी करना किसी को तड़ीपार करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने साफ किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत हर नागरिक को अपनी बात कहने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

सुनवाई के दौरान जज ने पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस जनता के प्रति जवाबदेह होती है, वह मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की ‘नौकर’ नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि नागरिकों को सरकार का गुलाम क्यों समझा जा रहा है कि वे विरोध तक नहीं कर सकते। कोर्ट ने पेपर लीक जैसे मुद्दों पर हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज करना सही नहीं है।

बता दें कि सईद चौधरी CAA, NRC, ज्ञानवापी विवाद और ईंधन की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करते रहे हैं। उनके खिलाफ 3 दिसंबर 2025 को डीसीपी (जोन 6) ने तड़ीपार का आदेश दिया था, जिसे 27 मार्च 2026 को विभागीय आयुक्त ने बरकरार रखा था। अब 2 जुलाई 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन दोनों आदेशों को पूरी तरह खत्म कर दिया है।